पिछले कुछ समय से कश्मीर में एसपीओ को अगवा करने के वाद उनकी हत्या करने के मामले सामने आए हैं। वीआईपी सुरक्षा में तैनात यह एसपीओ आतंकियों के सॉफ्ट टारगेट बनते हैं। जिससे इनकी जान पर खतरा बन चुका है। खासकर पंचायत चुनाव और निकाय चुनाव में इन पर खतरा बढ़ गया है। आतंकी भी एसपीओ को नौकरी छोड़ने के लिए कह चुके हैं। पुलिस का मानना है कि एसपीओ पर हमले करके आतंकी पुलिस को कमजोर कर रहे हैं। ऐसे में इनको वापस बुलाया गया है।
अभी कुछ दिन पहले ही कश्मीर में एक एसपीओ सात बंदूकें लेकर फरार हो गया। वह भी एक वीआईपी की सुरक्षा में तैनात था। इससे पहले कई एसपीओ के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की बात सामने आ चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि आतंकी जानबूझ कर एसपीओ को निशाना बना रहे हैं। वीआईपी के साथ रहने वाले उनके सॉफ्ट टारगेट बनते हैं। उन्हें मालूम होता है कि एसपीओ हथियार चलाने में इतने प्रशिक्षित नहीं है। इसलिए उन पर हमला करना आसान हो जाता है। इस आदेश से वीआईपी को सुरक्षित रखने की भी कोशिश की गई है।
हाल ही में गृह विभाग की ओर से एसपीओ के मानदेय में बढ़ोतरी की गई है। राज्य में करीब 30 हजार एसपीओ पुलिस विभाग में अपना योगदान दे रहे हैं।