जम्मू-कश्मीर में पहले चरण के लिए बुधवार को होने जा रहे मतदान में कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। दक्षिण कश्मीर और चिनाब वैली में हो रहे चुनाव में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती के सामने अपनी राजनीतिक विरासत को बचाने की चुनौती होगी।
इस बार उन्होंने अपने को चुनावी भंवर से दूर रखते हुए बेटी इल्तिजा मुफ्ती पर दांव लगाया है। चुनाव में दो पूर्व सांसदों समेत दर्जनभर से अधिक पूर्व मंत्रियों व पूर्व विधायकों, की प्रतिष्ठा फंसी हुई है। दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां व कुलगाम और चिनाब वैली के डोडा, किश्तवाड़ व रामबन जिले की 24 सीटों पर मतदान होगा।
माकपा के दिग्गज एमवाई तारिगामी, महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती व वहीद-उर-रहमान परा, सरताज मदनी, पूर्व सांसद हसनैन मसूदी व नजीर अहमद लावे, शौकत अहमद गनई, कांग्रेस के राष्ट्रीय महामंत्री जीए मीर व भाजपा के सोफी युसूफ और जम्मू संभाग में पूर्व मंत्री सुनील शर्मा व शक्तिराज परिहार, पूर्व विधायक दलीप सिंह परिहार, आतंकी हमले में मारे गए परिहार बंधुओं के परिवार की शगुन परिहार, नेकां के सज्जाद अहमद किचलू, कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विकार रसूल वानी, पूर्व विधायक जीएम सरुरी, पूर्व एमएलसी फिरदौस टाक, डीडीसी चेयरमैन पूजा ठाकुर, पूर्व मंत्री अब्दुल मजीद वानी व नजीब सुहरावर्दी मुख्य चेहरे हैं।
चिनाब वैली के डोडा, रामबन व किश्तवाड़ में 2014 में पहली बार कमल खिला था जिसे दस साल बाद दोहराना भाजपा के लिए चुनौती बनी हुई है।
इस बार अवामी इत्तेहाद पार्टी, जमात से जुड़े निर्दलीयों की वजह से दक्षिण कश्मीर में मुकाबला रोचक हो गया है। क्षेत्रीय पार्टियों नेकां-पीडीपी के साथ ही कांग्रेस को अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती होगी।