प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों को नहीं मिलता प्रोत्साहन
नाजिया ने बताया कि प्रदेश में खेल और खिलाड़ियों को वो प्रोत्साहन नहीं मिलता है, जिसके वह हकदार है। विश्वकप विजेता टीम का हिस्सा होने के बावजूद किसी राजनेता या अधिकारी से शुभकामनाएं नहीं मिलीं। सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर जम्मू-कश्मीर से दो लड़कियों का चयन विश्वकप कैंप के लिए हुआ था।
इसमें से नाजिया का चयन विश्वकप की टीम में हुआ। विश्वकप में काफी कुछ सीखने को मिला। मैने डिफेंस के साथ अटैक पोजिशन पर खेला। विश्वकप की तैयारी के लिए सिर्फ एक महीने का समय मिला था। प्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों में खो-खो खेल का बड़ा विकास हुआ है। हमें भी इस तरफ ध्यान देने की जरूरत है।
खो-खो के साथ धावक भी हैं नाजियाविश्वकप विजेता टीम का हिस्सा नाजिया ने बताया कि वह धावक भी हैं। अभी भी मैराथन या एथलेटिक चैंपियनशिप में भाग लेती है। रन फॉर फन सहित अन्य मैराथन में पदक जीता है। खो-खो हमारा अपना खेल है। पहले इसमें कॅरिअर की संभावनाएं नहीं दिखती थी, लेकिन अब पता चला की है इस खेल में भी बहुत संभावनाएं हैं।
पढ़ाई के साथ खेल पर ध्यान देना था कठिन
नाजिया गांधीनगर महिला कॉलेज में बीए स्नातक की छात्रा हैं। बताती हैं कि कॉलेज में अंतर कॉलेज, यूनिवर्सिटी खो-खो चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन रहा है। कॉलेज से में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रही हूं। पढ़ाई के साथ-साथ खेल पर ध्यान देना कठिन है। जम्मू-कश्मीर में खो-खो खेल को बढ़ावा देने के साथ-साथ इसके कौशल उन्नयन की जरूरत है। खो-खो खेल में नई तकनीक आई हैं। हमें अपने खिलाड़ियों को इनसे रूबरू करवाना होगा, ताकि वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन कर सकें।