दरबार मूव के नए फार्मूले से वर्तमान परिस्थिति में एक नहीं बल्कि अनेक फायदे होने जा रहे हैं। दरबार मूव की नई व्यवस्था से करीब दस हजार कर्मचारियों के बजाय सीमित संख्या में कर्मचारियों को जम्मू से श्रीनगर ले जाना पड़ेगा। इससे कोरोना का खतरा कम होने के साथ इस व्यवस्था से करीब 200 करोड़ की राशि की भी बचेगी।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार दरबार मूव की व्यवस्था पर करीब 600 करोड़ की राशि खर्च होती है। नई व्यवस्था से जम्मू आधारित कर्मचारियों को श्रीनगर नहीं ले जाया जाएगा। इससे परिवहन पर जम्मू आधारित कर्मचरियों को श्रीनगर में ठहराने की व्यवस्था के अलावा दरबार मूव अलाउंस के रूप में मिलने वाले 25 हजार रुपये प्रति कर्मचारी भी नहीं देने पड़ेंगे।
कश्मीर आधारित कर्मचारियों के मामले में भी सरकारी रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन होने के पहले ही पचास फीसदी से ज्यादा कर्मचारी कश्मीर में अपने घरों को लौट चुके थे। ऐसे में उन्हें श्रीनगर ले जाने पर होने वाला खर्च भी सरकार को वहन नहीं करना पड़ेगा। सीमित संख्या में ही सरकार को वाहनों की व्यवस्था करनी पड़ेगी। सरकारी रिकॉर्ड को भी इधर से उधर करने की ज्यादा मशक्कत नहीं होगी।
इससे भी सरकारी कोष को लाभ होगा। कश्मीर में वर्तमान समय में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या अधिक होने की वजह से दरबार मूव में पूरी संख्या में कर्मचारियों के श्रीनगर न जाने की वजह से भी सामाजिक दूरी को बनाए रखने में भी मदद मिलेगी और इससे महामारी का खतरा भी कर्मचारियों के बीच फैलने का कम रहेगा।