केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी के बाद भाजपा हाई कमान ने रणनीति के तहत पार्टी के पूर्व महासचिव राम माधव को जम्मू कश्मीर में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है। माधव लंबे समय से जम्मू कश्मीर की राजनीति से जुड़े रहे हैं। पीडीपी और भाजपा के बीच गठबंधन के साथ अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर माधव की अहम भूमिका रही है।
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विधानसभा चुनाव में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए भाजपा हाईकमान अपने शीर्ष नेताओं के अनुभव का पूरा लाभ उठाना चाहती है। पार्टी पहले ही प्रदेश की लगभग सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े करने की बात कह रही है।
हालांकि कश्मीर में पार्टी का समर्थन पाने वाले निर्दलीय चेहरों की तलाश की जा रही है। वर्ष 2014 में अनुच्छेद 370, अफस्पा, पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थियों का भविष्य जैसे मुद्दों पर भाजपा और पीडीपी के नजरिए अलग थे।
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लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने माधव को पार्टी का मुख्य वार्ताकार बनाकर जम्मू कश्मीर भेजा था। उन्हीं की रिपोर्ट के आधार पर स्व. मुफ्ती मोहम्मद सईद के साथ भाजपा की पीडीपी के साथ सरकार बनी थी। प्रदेश भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं का माधव से संपर्क रहे हैं। भाजपा जम्मू संभाग के साथ कश्मीर में कमल को खिलाना चाहती है।
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जम्मू-कश्मीर में सियासी उठापटक तेज, भाजपा ने रेड्डी के साथ राम माधव को बनाया चुनाव प्रभारी
आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद हो रहे विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मंगलवार को अधिसूचना जारी की गई। इस बीच राजनीतिक उठापटक तेज हो गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस के बीच गठबंधन की सुगबुगाहट के बीच भाजपा ने धुरंधर नेता राम माधव को जी किशन रेड्डी के साथ चुनाव प्रभारी बनाया है।
जम्मू-कश्मीर में 2015 में पहली बार पीडीपी के साथ सरकार की पटकथा लिखने में राम माधव की अहम भूमिका रही है। माना जा रहा है कि उनके अनुभवों के आधार पर उन्हें दोबारा जम्मू-कश्मीर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अधिसूचना के अनुसार सात जिलों अनंतनाग, कुलगाम, शोपियां, पुलवामा, डोडा, किश्तवाड़ व रामबन की 24 सीटों के लिए 27 अगस्त तक नामांकन होगा।
हालांकि, पहले दिन किसी भी सीट पर पर्चा दाखिल नहीं किया गया। इस बीच विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया। प्रदेश में कुल 8878832 मतदाता 90 विधायकों का चुनाव करेंगे। इनमें 75812 सर्विस वोटर हैं।
पहले चरण की अधिसूचना के साथ ही प्रदेश में राजनीतिक उठापटक तेज हो गई है। पीडीपी के मुख्य प्रवक्ता सुहैल बुखारी व डीडीसी डॉ. हरबख्श सिंह, अपनी पार्टी के उपाध्यक्ष जफर इकबाल मन्हास व उनके बेटे व शोपियां नगर परिषद उपाध्यक्ष इरफान मन्हास, डेमोक्रेटिक आजाद पार्टी के महासचिव चौधरी हारुन खटाना ने इस्तीफा दे दिया।
वहीं, पीडीपी में दो साल बाद पूर्व मंत्री अब्दुल हक खान शामिल हुए। डॉ. हरबख्श ने बारामुला के सांसद इंजीनियर रशीद की अवामी इत्तेहाद पार्टी का दामन थाम लिया है। सुहैल ने पत्ते नहीं खोले हैं, जबकि जफर के कांग्रेस में शामिल होने की संभावना है।