विधानसभा चुनाव का माहौल गरमा चुका है। हर नेता मतदाताओं को लुभाने और सोशल मीडिया पर चर्चा पाने के लिए अलग-अलग तरीके खोज रहा है। बुधवार को गांदरबल से नामांकन भरने के बाद उमर अब्दुल्ला ने टोपी उतारकर लोगों से भावुक अपील की थी। इसके दूसरे ही दिन वीरवार को नौशेरा से पर्चा भरने के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना ने कुर्ते की फटी जेब से हाथ निकालकर दिखाया।
रैना ने फटी जेब दिखाते हुए लोगों से कहा कि मैं फकीर आदमी हूं। आज सुबह माता रानी के मंदिर में माथा टेकने लगा, तो पैसे निकालने के लिए जेब में हाथ डाला। जेब फटी निकली। मैं 10 साल पहले भी फकीर था, आज भी फकीर हूं। मतदाताओं को लुभाने के हथकंडे अपनाने वालों में दिग्गज नेता भी हैं।
दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर वॉर रूम से पुराने वीडियो चलाकर या तो पोल खोली जा रही है या फिर सुर्खियां बटोरी जा रही हैं। नेताओं के पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के एक पुराने इंटरव्यू में कश्मीरी की बात पर इंटरव्यू से उठकर चले जाना, नौशेरा से इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार सुरेंद्र चौधरी का भाजपा में रहते हुए बयानों का वीडियो खासा चर्चा में है।
गीतों से भर रहे उत्साह... गिदड़ां दा सुणेया ग्रुप फिरदा, कैंदे शेर मारना
वैल्लियां ने करली सलाह, कल्ला टकरे तां घेर मारना, गिदड़ां दा सुणेया ग्रुप फिरदा, कैंदे शेर मारना... पंजाबी गायक रंजीत बावा का यह गाना इन दिनों नेताओं के वीडियो में सुनाई दे रहा है। विधानसभा चुनाव के प्रचार के लिए जमकर इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर प्रचार के लिए बनाई जाने वाली 10 में से आठ रील में यही गीत ट्रेंड कर रहा है। इस गाने में नेता और उनके समर्थक विरोधियों को गीदड़ और खुद को शेर बताने में लगे हैं।