कश्मीर के अनंतनाग जिले की कोकरनाग सीट पर इस बार चौधर देखने को मिल रही है। पहली बार अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट पर 10 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें छह उम्मीदवारों के नाम के आगे-पीछे चौधरी है। अभी तक की परिदृश्य में सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला बनता दिख रहा है।
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यहां नेशनल कॉन्फ्रेंस के जफर चौधरी, पीडीपी के हारुन चौधरी और निर्दलीय गुलजार चौधरी के बीच टक्कर होने की उम्मीद है। बेशक ये सीट अनुसूचित (एसटी) आरक्षित है लेकिन यहां जीत-हार में गैर एसटी वोटर बड़ी भूमिका निभाता है।
कोकरनाग में जनजाति (एसटी) के मतदाता गैर एसटी के वोटर से कम हैं। अनुसूचित जनजाति के यहां 28 हजार मतदाता हैं जबकि गैर अनुसूचित जनजाति के 63 हजार मतदाता हैं। ऐसे में एसटी नेताओें को गैर एसटी वोटों से ही उम्मीद है। इसके लिए उम्मीदवार जी तोड़ जोर लगा रहे हैं।
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कोकरनाग क्षेत्र के राजनीतिक पर्यवेक्षक मुबाशिर अहमद कहते हैं कि सीट दक्षिण कश्मीर के व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में एक केंद्र बिंदु बन गई है। खासकर एसटी उम्मीदवारों को विभिन्न मतदाता समूहों से समर्थन मिलने के कारण। इस चुनाव में गैर-एसटी मतदाताओं के प्रभाव को कम करके नहीं आंका जा सकता है। निर्दलीय गुलजार चौधरी, पीडीपी के हारून और नेकां के जफर चौधरी इन वोटरों को साधने के लिए दिन-रात रैलियों और बैठकों में जुटे हैं।
वर्ष 2014 में जीते थे अब्दुल रहीम राथर
वर्ष 2014 में पीडीपी के अब्दुल रहीम राथर ने कांग्रेस के नेता और दो बार के विधायक पीरजदा मोहम्मद सईद को हराया था। राथर को 24284 वोट मिले थे, पीरजादा को 19713 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर नेकां के गुलाम नबी भट्ट रहे, जिन्हें 8248 वोट मिले।
इस सीट पर पूर्व में नेकां और कांग्रेस का दबदबा रहा है। दोनों दल तीन-तीन बार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। कांग्रेस और नेकां यहां मिलकर लड़ रहे हैं। यह जरूर दूसरे उम्मीदवारों के लिए एक चिंता हो सकते हैं लेकिन निर्दलीय भी वोट काटने की कोशिश करेंगे।
नए विधायक से उम्मीदें
क्षेत्र के रहने वाले अब्दुल जब्बार का कहना है कि भेड़ पालन, डेयरी फार्मिंग, और ट्राउट मछली पालन की अपार संभावनाए हैं। इसके अलावा यहां कई पर्यटन स्थल हैं। इनका बड़े स्तर पर विकास और विस्तार होना चाहिए। स्थानीय बेरोजगार युवाओं को पर्यटन स्थलों के विकास से रोजगार मिलेगा। चौधरी हुसैन जफर का कहना है कि क्षेत्र में सड़कों और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की जरूरत है।
क्षेत्र के मुख्य मुद्दे
पर्यटन स्थलों की हालत को सुधारना
स्वच्छ पानी न मिलना बड़ी समस्या
सड़कें टूटी हुई हैं, इनकी मरम्मत की मांग
युवाओं में स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं
एक मात्र सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी
10 वर्ष में क्या बदला
बोटेनिकल गार्डन बनने से पर्यटक बढ़े
वर्षों से फिल्मों की शूटिंग शुरू हुई
स्कूलों की स्थिति में सुधार आया