जम्मू और कश्मीर कैप्टिव पावर नीति -2020 में केंद्र शासित प्रदेश में बंद पावर प्लांट को दोबारा से शुरू करने के लिए निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। यह न केवल उद्योगपतियों को अपनी लोड डिमांड को पूरा करने के लिए सक्षम करेगा, बल्कि आवश्यकता अनुसार उन्हें ग्रिड में सरप्लस बिजली बेचने के लिए भी सक्षम करेगा। यह कदम उद्योगपतियों को चौबीस घंटे बिजली की आपूर्ति के साथ औद्योगिक विकास की दिशा में पहल होगा।
ग्रीन और क्लीन पावर उत्पादन के लिए नीति
जम्मू-कश्मीर जल और सौर ऊर्जा नीति ग्रीन और क्लीन पावर उत्पादन को बढ़ावा देगा। इसमें हाइड्रो और सोलर एनर्जी का उपयोग किया जाएगा। अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेशकों की भागीदारी के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जाएगा। सौर ऊर्जा स्रोत का उपयोग बढ़ाएगा जो पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए एक उपयुक्त निवेश का माहौल बनाने सहायता करेगा।
इससे स्वच्छ विकास तंत्र का लाभ उठाने, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने, अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश जुटाने, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, रोजगार सृजन और कौशल वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा नागरिकों में पर्यावरणीय चेतना, ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करेगा।
जम्मू व कश्मीर आयुष देखभाल निवेश नीति-2020 का उद्देश्य नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण आयुष देखभाल सेवाएं प्रदान करना है। इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में औषधीय पौधों के क्षेत्र को बढ़ावा देना, प्रदेश में हर्बल उद्योग स्थापित करने के लिए औषधीय पौधों का संरक्षण, विपणन और प्रसंस्करण करना है। इससे पहले प्रशासनिक परिषद ने अपनी पिछली बैठक में जम्मू और कश्मीर के लिए वूल-प्रोसेसिंग और हैंडलूम-हस्तशिल्प, औषधि, शिक्षा और पोल्ट्री क्षेत्र के लिए चार नीतियों को अपनाने को मंजूरी दी थी।
दूध उत्पादन बढ़ाने को 25 फीसदी सब्सिडी
प्रशासनिक परिषद ने डेयरी कोआपरेटिव सोसाइटीज योजना को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत डेयरी कोआपरेटिव सोसाइटीज को 50 फीसदी लोन और पूंजी का 20 फीसदी सरकार देगी। 25 फीसदी की सब्सिडी भी दी जाएगी। इस प्रकार से डेयरी से खर्च का लाभार्थी को महज पांच फीसदी ही देना होगा। इस योजना को नेशनल कोआपरेटिव डेवलपमेंट कारपोरेशन की मदद से कार्यान्वित किया जाएगा। योजना के लिए एपेक्स स्तरीय निगरानी कमेटी भी बनाई गई है।