जम्मू-कश्मीर में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए विशेषतौर पर बाल चिकित्सा प्रबंधन को मजबूत बनाया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में बाल चिकित्सा आईसीयू, मातृत्व आईसीयू और हाइब्रिड वार्ड को जल्द कार्यात्मक बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ नए मेडिकल कॉलेजों में नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) और बाल चिकित्सा गहन चिकित्सा इकाई (पीआईसीयू) को शीघ्र शुरू करने पर जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने मंगलवार को राज्य स्वास्थ्य सोसायटी की कार्यकारी समिति की उच्च स्तरीय बैठक में कोविड-19 आपातकालीन प्रतिक्रिया और स्वास्थ्य प्रणाली तैयारी पैकेज चरण -2 (ईसीआरपी) में तैयारियों की समीक्षा की। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि संभावित कोविड की तीसरी लहर के प्रभाव को कम करने के लिए सभी प्रभावी कदम उठाए जाएं।
जम्मू और श्रीनगर में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस जल्द एक-एक सेंटर आफ एक्सीलेंसी स्थापित किए जाएंगे। पांच जिला अस्पतालों में जल्द नए आरटीपीसीआर लैब को कार्यात्मक बनाया जा रहा है। जीएमसी श्रीनगर और जीएमसी जम्मू में जल्द डीएनए सिक्यूंसर की खरीद के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। मरीजों के लिए एडवांस लाइफ स्पोर्ट सुविधाओं से सुसिज्जत आधुनिक एंबुलेंस उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
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लोगों को कोविड उचित व्यवहार के प्रति जागरूक करने के लिए प्रभावी सूचना शिक्षा और संचार (आईईसी) अभियान चलाया जाए। इसमें एसओपीएस और वैक्सीन के थलाभ भी बताए जाएंगे। मिशन निदेशक एनएचएम ने ईआरएचएसपी की तैयारियों के बारे में जानकारी दी। डुल्लू ने दोनों संभागों के एमईडी चीफ इंजीनियर को जुलाई के अंत तक आक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि अगस्त के अंत तक 172 आक्सीजन जनरेशन प्लांट अस्पतालों में काम करना शुरू कर देंगे।