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Jammu Kashmir: 50 की उम्र के बाद निमोनिया, फ्लू और दाद के टीके लगवाएं, रखें स्वास्थ्य का ख्याल

Sun, 16 Mar 2025 09:58 AM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को फ्लू, निमोनिया और शिंगल्स जैसे संक्रमणों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण करवाने की सलाह दी गई है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को निमोनिया, फ्लू और दाद (शिंगल्स) जैसी बीमारियों से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए। यह कदम बुजुर्गों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और गंभीर संक्रमणों से बचाने में मददगार साबित हो सकता है। खासकर उन लोगों के लिए यह टीकाकरण और भी जरूरी है, जो मधुमेह, किडनी रोग या तनाव जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। 

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जीएमसी कठुआ के विशेषज्ञ डॉ. मानिक महाजन बताते हैं कि अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) और इंडियन चेस्ट सोसाइटी के अनुसार, फ्लू और निमोनिया जैसे संक्रमण बुजुर्गों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं।

इनसे बचाव के लिए फ्लू वैक्सीन और निमोनिया वैक्सीन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। निमोनिया वैक्सीन विशेष रूप से 13 प्रकार के निमोनिया से बचाव करती है। वहीं, दाद (शिंगल्स) जो जोस्टर वायरस के कारण होता है, से बचने के लिए शिंगल्स वैक्सीन भी बेहद प्रभावी मानी जाती है।
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डॉ. महाजन का कहना है कि शिंगल्स वैक्सीन 50 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए अनुशंसित है। यह टीका त्वचा पर होने वाले चकत्तों और अन्य संबंधित समस्याओं को रोकने में मददगार है। टीकाकरण का सही समय भौगोलिक क्षेत्र पर निर्भर करता है। गर्मी वाले क्षेत्रों में यह सितंबर-अक्तूबर के बीच, मानसून वाले इलाकों में जुलाई-सितंबर के बीच, और अन्य क्षेत्रों में अप्रैल-मई के बीच करवाना उपयुक्त होता है। हालांकि, निमोनिया और शिंगल्स वैक्सीन का सही समय डॉक्टर से परामर्श कर तय किया जाना चाहिए।

डॉ. महाजन ने आगे कहा कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इन टीकों को लगवाने से बुजुर्ग न केवल गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि अपने जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार कर सकते हैं। उन्होंने यह भी सलाह दी कि किसी भी टीके को लगवाने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह आपकी स्वास्थ्य स्थिति के लिए उपयुक्त है।

बच्चों और महिलाओं के लिए 11 किस्म के टीके
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को 11 किस्म का टीकाकरण और मौखिक वैक्सीन दी जा रही है। इस साल 0-1 साल के 197460 नवजात को वैक्सीनेशन करने का लक्ष्य रखा गया है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, पूर्णतः वैक्सीनेटेड बच्चों का प्रतिशत बढ़कर 96.5 हो गया है। 

प्रदेश में राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार पोलियो, हेपेटाइटिस, टीबी, गर्भवती महिलाओं और बच्चों में टेटनस, काली खांसी, डिप्थीरिया (गलघोठू), डायरिया (रोटा वायरस के कारण दस्त), निमोनिया, दिमागी बुखार, खसरा, मीसल्स रूबेला, रात के अंधापन से बचाव के लिए विटामिन ए की वैक्सीन दी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के सभी उपकेंद्र स्तर तक ये वैक्सीन मुफ्त में उपलब्ध करवाई जा रही हैं। 
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रोहिग्याओं में टीकाकरण को लेकर भ्रांतियां
जम्मू कश्मीर में एक विशेष समुदाय और रोहिंग्याओं में टीकाकरण को लेकर चुनौती बनी हुई है। इस समुदाय की आबादी में टीकाकरण को लेकर विभिन्न भ्रांतियां हैं। समुदाय के लोगों का मानना है कि टीकाकरण के बाद उनके बच्चों के सिर पर तेज बुखार, पोलियो, कमजोरी आदि की शिकायत हो जाती है। इस आबादी को कवर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें उन तक पहुंच कर टीकाकरण के बेहतर प्रभाव के बारे में जागरूक करती है। 

यूविन प्लेटफार्म के जरिए देश में कहीं भी जाकर करा सकते हैं टीकाकरणडिजिटल प्लेटफार्म से देश के किसी भी हिस्से में जाकर बच्चों का टीकाकरण करवाया जा सकता है। जम्मू कश्मीर में कोविड में कोविन प्लेटफार्म के बाद टीकाकरण के लिए यूविन प्लेटफार्म का प्रयोग किया जा रहा है इसके तहत बच्चों का डिजिटल जानकारी एक निर्धारित पोर्टल में डाली जाती है। इसके बाद अगर बच्चा किसी दूसरे राज्य में गया है तो संबंधित पोर्टल के तहत उसका विवरण वहां देखकर टीकाकरण किया जाता है। इसमें टीकाकरण का डिजिटल प्रमाण पत्र भी डाउनलोड किया जा सकता है।
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