5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से प्रदेश खासकर कश्मीर घाटी में बदलाव दिख रहा है। सुरक्षाबलों का और आतंक पर प्रहार जारी है। सुरक्षा बलों को तीन साल में घाटी में 543 आतंकियों को मार गिराने में सफलता मिली है। इनमें से ए केटेगरी के 150 टॉप आतंकी कमांडर शामिल हैं।
220 आतंकियों ने या तो सरेंडर किया है या वे जिंदा पकड़े गए हैं। जिससे सीमापार बैठे उनके आकाओं में बौखलाहट है और उन्होंने रणनीति बदलकर टारगेट किलिंग शुरू की है। पत्थरबाजी की घटनाओं में भी बहुत कमी आई है। पत्थरबाजों के खिलाफ सख्त नीति से पथराव की घटनाआें में 87.31 फीसदी गिरावट दर्ज की गई।
केंद्र ने हथियार उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सुरक्षाबलों को खुली छूट दी। इससे ऑपरेशन ऑल आउट में तेजी लाई गई। सोशल मीडिया पर भी आतंकवाद का महिमामंडन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की गई। स्थानीय युवा बहुत कम आतंक का रास्ता अपना रहे हैं। 2019 के बाद से अब तक सिर्फ 350 के करीब स्थानीय युवाओं ने आतंकवाद का रास्ता अपनाया है।
अलगाववाद की हवा निकली
पाकिस्तान के इशारे पर निकलने वाले देश विरोधी सुर अब बंद हो गए। तब से कश्मीर के किसी कोने से पाकपरस्ती की आवाज नहीं उठी। न कोई मजलिस हुई, न सरकार के फैसलाें के खिलाफ आवाज उठी और न ही पाकिस्तान के झंडे लहराए। न प्रदर्शन हुए और बंद की कॉल दी गई।