संभाग में 68 फीसदी इलाके में सिंचाई सुविधा नहीं, कश्मीर में 39 फीसदी किसान ढूंढ रहे पानी का जरिया
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू संभाग में सिंचाई सुविधाएं नाकाफी होने से किसान चिंतित हैं। संभाग में 68 फीसदी और कश्मीर में 39 फीसदी इलाका असिंचित है। इस कारण किसान हर मौसम में बारिश पर निर्भर हैं। इंद्र देव का साथ मिलने पर पैदावार ठीक होती है अन्यथा उन्हें परिवार को पेट भरने के लिए अन्य जरिया देखना पड़ता है।
अधिकांश इलाका पहाड़ी होने के कारण सिंचाई सुविधाएं न के बराबर हैं। यहां पर सीधा पानी खेतों तक नहीं पहुंचता है। इससे पैदावार में भी गिरावट आती है। सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने के लिए योजनाएं सिरे नहीं चढ़ पाई हैं। जम्मू संभाग में गेहूं की पैदावार 20 और घाटी में 25 फीसदी होती है।
इसी प्रकार जम्मू में धान की 23 और कश्मीर में 69 प्रतिशत पैदावार होती है। सिंचाई के अभाव में दालों की पैदावार जम्मू संभाग में पांच प्रतिशत ही है। कश्मीर में दस फीसदी दालें उगाई जाती हैं। कृषि विभाग के अनुसार कंडी इलाकों में सिंचाई सुविधा देने पर योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
यहां पर खेती प्राकृतिक झरनों, बारिश के एकत्रित पानी से होती है। बारिश न होने पर फसल बीजाई में देरी होती है। वहीं, फसल बीजाई के बाद पानी की समय-समय पर जरूरत रहती है। बारिश न होने से पैदावार पर सीधा असर पड़ता है।
पहाड़ी इलाकों में सिंचाई की सुविधा नाकाफी है। खेती बारिश पर ही निर्भर करती है। प्राकृतिक झरनों का प्रयोग भी खेती के लिए होता है। इसके अलावा विभाग भी सिंचाई सुविधाएं एक या दो हैक्टेयर के लिए देता है।
- मोहम्मद इकबाल चौधरी, कृषि निदेशक, कश्मीर