जम्मू संभाग में अस्पतालों को अपग्रेड करके बेडों की संख्या में बढ़ोतरी की जा रही है, लेकिन अस्पतालों से निकलने वाली बायो मेडिकल वेस्ट पर कुछ खास नहीं हो पाया है। इस वेस्ट को खत्म करने के लिए अधिकतर म्यूनिसिपल कमेटियों, नगर निगम और खड्ढों का ही सहारा लिया जा रहा है। शहर के कुछ अस्पतालों में संक्रमित वेस्ट को खत्म करने के लिए इंसिलेटर को अपग्रेड किया गया था, लेकिन यह नाकाफी हैं।
नए प्रोजेक्टों में दो सौ से ज्यादा बेड वाले रेशम घर स्थित सुपर स्पेशलिटी के अलावा एसएमजीएस के नए पीडियाट्रिक ब्लाक के 220 बेड और गांधीनगर अस्पताल में निर्माणाधीन 220 बेड वाले जच्चा-बच्चा अस्पताल, साइक्रेटरी अस्पताल के नए ब्लाक, जीएमसी की नए इमरजेंसी में सौ से ज्यादा नए बेड स्थापित किए गए हैं।
चिकित्सा केंद्रों के अपग्रेड होने से बेडों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई, जिससे बायो मेडिकल बेस्ट में भी वृद्धि हो रही है। सरकारी अस्पतालों में बायो मेडिकल बेस्ट मैनेजमेंट एंड हैंडलिंग रूल्स एक्ट 1998, 2000 के तहत इस बेस्ट को उचित ढंग से खत्म करने का प्रावधान है। जीएमसी में इन्फेक्शन बेस्ट को नष्ट करने के लिए इंसिलेटर को अपग्रेड करके 100 किलोग्राम प्रति घंटा, एसएमजीएस में पचास किलोग्राम प्रति घंटा किया गया है।
अस्पतालों से निकलने वाली जनरल बेस्ट में कागज, लिफाफे और इन्फेक्शन बेस्ट में उपयोग हुई सुई, पट्टियां और अन्य प्रकार की उपयोग हुई दवाइयां शामिल होती हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकांश जिला अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों की बेस्ट को खत्म करने के लिए अभी भी खड्ढों का ही सहारा लिया जा रहा।
कहां ठिकाने लगेगा इतना बेस्ट
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में करीब 6000 बेडों से रोजाना बेस्ट निकल रहा है, जबकि अलग से नए ब्लाक भी शामिल हैं। शहर के अस्पतालों में प्रतिदिन प्रति एक बेड से दो किलो के करीब बायो मेडिकल बेेस्ट निकलती है। सरकारी अस्पतालों में से 80 प्रतिशत में जनरल और 15-20 प्रतिशत में इन्फेक्शन बेस्ट शामिल होती है।
जिला स्तर पर इंसिलेटर का इंतजार
एनआरएचएम के तहत दूरवर्ती जिला राजोरी, डोडा, लेह और कारगिल में प्रस्तावित करीब 100 किलो प्रति घंटा के इंसिलेटर के स्थापित होने का इंतजार है। इसी तरह जम्मू और श्रीनगर में अलग से एक-एक बायो कामन बेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की भी कवायद चल रही है, लेकिन अभी तक कुछ खास नहीं हो पाया है।