हिसार की अमूल्या, बेंगलुरू की अर्का, पंजाब की परपल प्रजातियों पर चल रहा ट्रायल
सतीश वालिया
जम्मू। जम्मू संभाग में अमरूद की नई किस्में उगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इन नई किस्मों के अमरूद दो साल के अंदर फल देने लगेंगे और अंदर से गुलाबी होंगे। इनकी खासियत यह होगी कि यह पारंपरिक किस्म के अमरूद से ज्यादा मीठे होंगे और इसके बीज छोटे होंगे। स्कास्ट जम्मू के बागवानी विभाग में मौजूदा समय में गुलाबी किस्म के अमरूद के अलावा हिसार के अमूल्या, बेंगलुरू की अर्का और पंजाब की परपल किस्मों पर भी ट्रायल चल रहा है। इस साल के अंत तक ट्रायल को पूरा कर लिया जाएगा और इन किस्मों को प्रदेश में उगाया जा सकेगा। मौजूदा समय में जम्मू संभाग में उगने वाले अमरूद चार से पांच साल में फल देते हैं। इसकी बाजार में डिमांड ज्यादा नहीं है। स्थानीय मंडियों में अमरूद को बेचा जाता है। इनका आकार भी छोटा है। नई किस्मों को बाजार की मांग के अनुरूप ढाला जाएगा। इनकी नर्सरी तैयार की जा रही है। 2024 से पौधे बागवानों को वितरित होंगे।
क्षेत्रफल बढ़ने से पैदावार बढ़ेगी, इससे सस्ता मिलेगा स्थानीय फल
अमरूद की नई किस्मों पर काम करने का बागवानी विभाग का मकसद क्षेत्र में बागवानी के अधीन अमरूद का क्षेत्रफल बढ़ाना है। अधिकारियों का कहना है कि अभी जम्मू संभाग से पंजाब सहित अन्य राज्यों से अमरूद आता है। इसके चलते बाजार में इसकी कीमत चढ़ी रहती है। स्थानीय बाजार में अमरूद का भाव 80 रुपए से नहीं टूटता। यहां के किसान अगर नई और ज्यादा उत्पादन वाली किस्में लगाएंगे तो इससे किसान की आमदनी तो बढ़ेगी ही, स्थानीय पैदावार से बाजार की मांग पूरी होगी और अमरूद की कीमत नियंत्रित होने से यह 40 रुपए तक लोगों को उपलब्ध हो पाएगा।
कोट
नई किस्मों को अगले साल बागवानों को बांटा जाएगा। दो साल में पौधे तैयार होते हैं और फल देने शुरू करते। ट्रायल अंतिमत चरण में चल रहा है। - प्रशांत बख्शी, वैज्ञानिक, बागवानी विभाग स्कास्ट जे