कुख्यात नशा तस्कर से जहांगीर अहमद खान पर लगे पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) हटाने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया। हाईकोर्ट के न्यायाधीश ताशी राबस्तन ने पीएसए हटाने के आवेदन पर गौर करने के बाद कहा कि जहांगीर पर लगे आरोप न सिर्फ समाज विरोधी हैं, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए खतरनाक हैं।
खासकर बेरोजगार युवक इसका बुरी तरह शिकार हो रहे हैं। जहांगीर अहमद पर चार फरवरी 2016 को डिवीजनल कमिश्नर कश्मीर ने पीएसए लगाने के आदेश जारी किए थे। वर्तमान में आरोपी कुपवाड़ा जिला जेल में बंदी है।
आरोपी को 19 दिसंबर, 2015 को चार बोतल कोडाइन के साथ बारामुला में गिरफ्तार किया गया और उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। 23 दिसंबर को उसे फिर आठ बोतल कोडाइन और 61 बोतल ओनरेक्स के साथ गिरफ्तार किया गया।
पट्टन थाने में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार सभी मामलों में वह शामिल नहीं था और उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं और समाज के लिए घातक हैं। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने पीएसए खारिज करने की याचिका को रद्द कर दिया।