- गांधी नगर महिला काॅलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय स्टार्टअप महोत्सव का समापन
- दिल्ली के राहुल कुमार ने आयुर्वेदिक दवाओं, श्रीनगर की महक ने सजाई डिजाइनिंग कैंडल
- उत्तराखंड के अरोमा विलेज में फूलों से बन रहे कई उत्पाद, स्थानीय उत्पादों को मिल रहा बढ़ावा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। गांधी नगर के महिला कॉलेज में दो दिवसीय राष्ट्रीय स्टार्टअप महोत्सव में कोरोना काल में स्टार्टअप शुरू कर उसको नई ऊंचाई दे चुके युवा अब उत्साह से लबरेज हैं। महोत्सव के दूसरे व अंतिम दिन हालांकि भीड़ कम ही रही, घर जाने की आपाधापी के बाद भी अपना स्टाल समेटते समेटते युवा ग्राहकों के साथ संवाद स्थापित कर अपने उत्पादों की जानकारी देते रहे।
यहां पर दिल्ली के राहुल कुमार ने आयुर्वेदिक दवाओं, श्रीनगर की महक व जहूर अहमद चमड़े से बने बैग, जम्मू की आरुषि गाय के गोबर से बनी धूप, दीये व उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के आशीष राणा ने मोटे अनाज के उत्पाद, सुगंधित फूलों से बने तेल का स्टाल दिनभर लोगों को आकर्षित करता रहा।
उनका कहना था कि अपना काम सुकून व उमंग देता है, जो आप कमाते हैं वह अपना होता है। राष्ट्रीय स्टार्टअप महोत्सव में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के आशीष राणा अरोमा विलेज के नाम से विख्यात हो चुके हैं। उन्होंने धार में प्लांट लगाकर मिलेट्स, खुशबूदार तेल, रेडी टू ईट के तहत पोहा, खिचड़ी व डोसा, चाय बेच रहे हैं। उनका कहना है कि इन उत्पादों को आप जंक फूड्स की जगह प्रयोग कर सकते हैं। यह पूरी तरह सुरक्षित व स्वास्थ्यवर्धक हैं। करीब एक वर्ष में 10 से 12 करोड़ रुपये तक की आय प्राप्त कर रहे आशीष राणा ने अपना सेटअप गांव व आसपास के 10 हजार किसानों, 45 गांव के लोगोंं के साथ मिलकर 2016 में शुरू किया था। 104 हेक्टेयर में फैले अरोमा विलेज को अब पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका कहना था कि महोत्सव में काफी अच्छी आय हुई हैं, लोगों ने उत्पाद पसंद किए हैं। स्थानीय उत्पाद चौलाई, बाजरा व भूजा से बने उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे।
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आयुर्वेदिक टेबलेट से शुगर व फैटी लीवर छूमंतर
आयुर्वेदिक कंपनी का स्टाल लेकर पहुंचे राहुल कुमार ने बताया कि उनकी कंपनी की आयुर्वेदिक दवा काफी सस्ती हैं। इसमें शुगर व फैटी लीवर की समस्या से जूझ रहे लोगों को फायदा मिलेगा। इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। आयुर्वेदिक दवाओं को केंद्र सरकार भी प्रोत्साहित कर रही है। करीब 80 लोगाें ने स्टाल पर जानकारी ली है। वर्ष 2018 में कंपनी ने अपना स्टार्टअप शुरू किया था।
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कश्मीर की महक ने बनाई हैं डिजाइनिंग कैंडल
महोत्सव में श्रीनगर के सुनवार से आईं महक ने बताया कि 2020 में कोरोना काल में काम शुरू किया। डिजाइनिंग कैंडल व परफ्यूम्ड कैंडल की आनलाइन मार्केटिंग कर रही हैं। साथ ही राजस्थान से मेंहदी की पत्तियां मंगाकर उसको पीसकर आर्गेनिक मेहंदी के कोन बनाकर मार्केट में बेच रही हैं। महोत्सव में उनके उत्पादों को काफी पसंद किया गया। हर माह 10 से 15 हजार रुपये कमा रही हैं। शादी आदि सीजन में आय 50 हजार रुपये तक हो रही है।
जहूर ने लेदर पर्स बनाने से शुरू किया काम
श्रीनगर के छतावल निवासी जहूर ने बताया कि वह लेदर के लेडीज पर्स से लेकर बड़े बैग बनाने का काम करते हैं। उन्होंने स्टार्टअप वर्ष 2002 में शुरू किया था। इसमें लेडीज पर्स, बड़े बैग सहित बच्चों के जैकेट्स शामिल हैं। कोविड में सरकार की तरफ से 15 हजार रुपये की सहायता भी मिली थी। हालांकि, यह कम थी, लेकिन उत्साह बढ़ाने के लिए यह काफी महत्वपूर्ण साबित हुई। उनके पास 80 रुपये से ढाई हजार रुपये तक के उत्पाद मौजूद हैं।
आरुषि बना रहीं गाय के गोबर से अगरबत्ती व धूप
स्टार्टअप महोत्सव में स्टाल लगाकर लोगों को गाय के गोबर से बने उत्पादों को दिखा रहीं जम्मू के मिश्रीवाला निवासी अरुषि का उत्साह देखते ही बना। उन्होंने बताया कि मिश्रीवाला में 50 महिलाओं के साथ काम शुरू किया गया है। इसमें अपनी भारतीय संस्कृति में सर्वाधिक पूज्यनीय गाय के गोबर से बने धूप, दीये, हवन सामग्री सहित मंदिर में चढ़ाए जाने वाल फूलों को हम लेकर उनसे सुगंधित अगरबत्ती बना रहे हैं। इसमें हमें सर्वाधिक ग्राहकों का समर्थन मिला है।
जहूर अहमद। अमर उजाला
जहूर अहमद। अमर उजाला
जहूर अहमद। अमर उजाला
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