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Jammu News: रंग बिरंगे फूल और सजावटी पौधे मंदिरों के शहर की बढ़ा रहे शोभा

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त्रिकुटा नगर ​स्थित नर्सरी में फूलों का चयन करता युवक। संवाद
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सौंदर्यीकरण के साथ-साथा पूजा और ज्योतिष दृष्टिकोण से भी पौधों की अधिक मांग
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बोगनविला और एक्जोरा कोलकाता, मल्टी कलर गुलाब पुणे, बोनसाई प्लांट मंगवाए जा रहे सहारनपुर से
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। मंदिरों के शहर जम्मू के लोगों की पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते पुष्प नर्सरी का व्यापार भी फल फूल रहा है। घर, दुकान या कार्यालय में हर जगह हरियाली को विशेष महत्व दिया जा रहा है। फूलों व सजावटी पौधों के चलन की वजह से इनकी भारी मांग है।
लोग न सिर्फ घरों के आंगन, बल्कि रूफ टॉप गार्डन और ड्राइंग रूम में भी फूलों के पौधे लगा रहे हैं। इससे न सिर्फ सौंदर्यीकरण होता है बल्कि वायु गुणवत्ता में भी काफी सुधार होता है। इसके चलते पुष्प नर्सरियां भी बदलाव के साथ काम करने का तरीका भी बदल रही हैं।
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नर्सरी संचालक मोबाइल पर ही फूलों की फोटो भेज कर पौधा पसंद करवाते हैं और फिर माली को संबंधित पता देकर लॉन या गमलों में पौधे लगवाने की सुविधा दे रहे हैं।

सोशल मीडिया का दिख रहा असर
सोशल मीडिया के इस दौर में अन्य राज्यों में मिलने वाले फूलों के बीजों को मंगवा कर शहर में ही पौधे तैयार कर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। 45 साल से जम्मू में माली का काम कर रहे इंद्रजीत ने बताया कि बागवानी में काफी बदलाव आ चुका है। सोशल मीडिया के चलते लोग काफी जागरूक हुए हैं। अब उनकी मांग को देखते हुए चंडीगढ़, कोलकाता सहित अन्य राज्यों से डेलिया, पैंजी, बरबीना, पिटूनिया आदी के पौधे या बीज मंगवा रहे हैं। पौधों की मांग बढ़ने से कारोबार बढ़ा है।

आंध्र प्रदेश से मंगवाया जा रहा रुद्राक्ष
पनामा चौक में तीस साल से नर्सरी चला रहे पुष्पेंद्र ने बताया कि अब पौधे सिर्फ साैंदर्यीकरण तक ही सीमित नहीं हैं। लोग ज्योतिष दृष्टिकोण से भी उनका चयन कर रहे हैं। शमी, पारिजात, स्नेक प्लांट और रुद्राक्ष के पौधों की मांग बहुत बढ़ गई है। रुद्राक्ष को आंध्र प्रदेश से विशेष मांग पर मंगवाया जाता है। लाल गुलाब, गेंदा, चमेली आदि को जम्मू में ही तैयार कर लेते हैं, लेकिन हाइब्रिड गुलाब (लाल, सफेद व पीला) के पौधों को पुणे से मंगवाते हैं। बोगनविला और एक्जोरा कोलकाता तो बोनसाई को पंजाब व सहारनपुर से मंगवाते हैं।
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लोग पौधे स्वयं पसंद कर देते हैं आर्डर
त्रिकुटा नगर स्थित नर्सरी के मालिक मोहम्मद सूफियान ने बताया कि मौजूदा समय में लोग ऑनलाइन ही पौधे पसंद कर लेते हैं। लॉन के मुताबिक आर्डर देते हैं। फिर हम माली को भेज कर होम डिलीवरी के साथ पौधों को लगवा भी देते हैं। इस चलन को लैंडस्केप गार्डनिंग कहा जाता है। इससे नर्सरी का काम बढ़ा है। उनके पास रैननकुलस, प्रिमुला, पेटुनिया और गुलाब सहित सजावटी पौधों की लगभग 150 प्रजातियां उपलब्ध हैं।
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