त्रिलोकपुर में श्रीमद्भागवत कथा का छठा दिन
आतंकी हमले में मारे गए लोगों की आत्मा शांति के लिए रखा मौन
संवाद न्यूज एजेंसी
दोमाना। जब मनुष्य में अभिमान होता है तब भगवान उनसे दूर हो जाते हैं। लेकिन, जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है। उन्हें दर्शन देते हैं। यह ज्ञान कथा वाचक मृदुल मोहन शास्त्री ने त्रिलोकपुर में जारी श्रीमद्भागवत कथा के दौरान संगत को दिया।
बुधवार को छठे दिन की कथा में शुरू करने से पहले पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए मौन रखा गया। उन्होंने बताया कि भगवान की अनेक लीलाओं में रास लीला श्रेष्ठ है। रास तो जीव का शिव के मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है।
इस कथा में कामदेव ने भगवान पर खुले मैदान में अपने पूर्व सामर्थ्य के साथ आक्रमण किया था, लेकिन वह पराजित नहीं कर पाए।रास लीला में जीव का शंका करना या काम को देखना ही पाप है। भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ हुआ था, लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया।
इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी हैं और वह नारायण से दूर नहीं रह सकतीं। यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो वह ठीक नहीं है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा प्राप्त हो जाती है।
श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मणि के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया। कथा के दौरान व्यास ने भजन प्रस्तुत किए।