Ladakh People Protest in Jammu (File)
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एलएसी पर चीन की चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना करने के लिए लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। लद्दाख की दो प्रमुख संस्थाओं में से एक लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) ने तीन फरवरी को इस मुद्दे पर लेह चलो का आह्वान किया है। साथ ही एलएबी के सहयोगी संगठन कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (केडीए) ने भी कारगिल बंद बुलाया है। दोनों संगठनों ने संयुक्त रूप से पिछले महीने मांगों से संबंधित ज्ञापन गृह मंत्रालय को सौंपा था। इस बीच मैग्सायसाय पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक की ओर से फिर 21 दिन के आमरण अनशन पर तीन फरवरी के बाद जाने की उम्मीद की जा रही है।
एलएबी और केडीए की ओर से गत 16 जनवरी को मांगों से संबंधित व्यापक मसौदा गृह मंत्रालय को सौंपा गया था। इसमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग प्रमुख रूप से रखी गई थी। ज्ञापन में लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत राज्य का दर्जा देने के कारणों का विवरण दिया है, जिसे 2019 में पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर से अलग कर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। कहा गया है कि लद्दाख चीन और पाकिस्तान की सीमाओं से जुड़ा हुआ है और रणनीतिक एवं सामरिक दृ्ष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
लद्दाख के भूगोल के कठिन इलाकों में स्थानीय लोगों की समझ हमेशा सैन्य और रसद संचालन में देश के लिए मददगार साबित हुई है। ऐसे में इन मांगों को पूरा किए जाने से स्थानीय लोगों को सशक्त बनाने से स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों को पूर्ण राज्य का दर्जा है। उन्हें संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया गया है और उनके अधिकारी अनुच्छेद 371 के तहत संरक्षित भी हैं। लद्दाख के लोगों के अधिकारों को भी संरक्षित किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में लद्दाख के पारिस्थितिक रूप से नाजुक और संवेदनशील क्षेत्रों पर भी प्रकाश डाला गया। इसमें कहा गया है कि लद्दाख की पारिस्थितिकी न केवल देश के जलवायु पैटर्न में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है बल्कि दुनिया पर भी प्रभाव डालती है। छठी अनुसूची में शामिल किए जाने से अनुसूचित जनजातियों के भूमि अधिकारों के लिए विशेष सुरक्षा सुनिश्चित होगी और क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप कानून बनाने में सहायता मिलेगी। एलएबी और केडीए ने भर्तियों के लिए एक अलग लोक सेवा आयोग की भी मांग की, ताकि यहां राजपत्रित व गैर राजपत्रित पदों पर भर्ती की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। साथ ही राज्यसभा में एक सीट आवंटित करने के अलावा लोकसभा सीटों की संख्या एक से बढ़ाकर दो करने की भी मांग की गई है।