दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आश्रम प्रवीण कॉलोनी त्रिकुटा नगर में हुआ सत्संग
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। ईश्वर के दर्शन और प्राप्ति केवल गुरु की कृपा से ही संभवन है। गुरु की दिखाई राह पर चल कर भी प्रभु से मिलन हो सकता है। यह ज्ञान गुरुदेव आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी हरिदासानंद ने रविवार को दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आश्रम प्रवीण कॉलोनी त्रिकुटा नगर में आयोजित एकदिवसीय सत्संग में संगत को दिया।
इस दौरान उन्होंने बताया कि शास्त्रों में गुरु सत्ता की महिमा को नेति नेति कहा गया है। ईश्वर दर्शन आध्यात्मिक पथ पर मनुष्य की आरंभिक अवस्था है, जिसके लिए पूर्ण सद्गुरु की कृपा नितांत आवश्यकता है। ब्रह्म ज्ञान की दीक्षा के द्वारा एक पूर्ण सद्गुरु अंतर जगत में ही प्रभु के दिव्य स्वरूप का दर्शन करवाता है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विश्वास एक साधक के गहने हैं, जो उसे सुंदर आत्मिक स्वरूप प्रदान करते हैं। साधक का विश्वास चट्टान से भी मजबूत होता है। वह विश्वास विश्वास नहीं होता जो जीवन में आई जरा सी कठिनाइयों में डावांडोल हो जाए। श्रद्धा व विश्वास की मजबूत डोर ही एक साधक को मंजिल प्राप्ति में अत्यंत सहायक है।
उन्होंने कहा कि गुरु वचनों को जीवन में धारण करते हुए सत्संग, सेवा, साधना, सुमिरन को प्राथमिकता देकर ही एक साधक श्रद्धा विश्वास को दृढ़ करता है और पूर्णता को भी प्राप्त करता है। सत्संग गुरु शिष्य के मध्य एक बाहरी संवाद और साधना एक आंतरिक संवाद है। सेवा का मार्ग अत्यंत कठिन परंतु सौभाग्यशाली व्यक्ति ही प्राप्त करता है। कार्यक्रम के दौरान स्वामी सुचेतानंद, महात्मा रमन, महात्मा गुरप्रीत, सुनील जी ने सुंदर भजन सुनाए।