हिंदी के ख्याति प्राप्त उपन्यासकार भीष्म साहनी के उपन्यास तमस का डोगरी में किया है अनुवाद
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर वर्ष 2024 के साहित्य अकादमी पुरस्कारों में ट्रांसलेशन अवार्ड की घोषणा की गई।
जम्मू के ग्रेटर कैलाश निवासी साहित्यकार व अनुवादक प्रोफेसर अर्चना केसर को हिंदी के ख्याति प्राप्त उपन्यासकार भीष्म साहनी के उपन्यास तमस का डोगरी भाषा में अनुवाद करने पर साहित्य अकादमी का ट्रांसलेशन अवार्ड देने की घोषणा हुई है।
प्रो. अर्चना केसर ने कहा कि उन्होंने डोगरी भाषा में कई किताबों का अनुवाद किया है। उन्होंने खुद तीन किताबें डोगरी भाषा में लिखी हैं। इसमें प्रमुख रूप से डोगरी साहित्य मेरी नाजरिच, भारतीय काव्य शास्त्र, रोमाल सिंह भदवाल शामिल हैं। साथ ही सात किताबों का डोगरी में अनुवाद किया है। इसमें उड़िया भाषा की लघु कहानियां, पंजाबी भाषा, हिंदी आदि की किताबें शामिल हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान का भी डोगरी भाषा में अनुवाद किया है।
साहित्य अकादमी का ट्रांसलेशन अवार्ड मिलने पर खुशी जताई। इसके साथ ही प्रो. अर्चना ने मोहन सिंह के लिखे स्टेज प्ले नयन व डोगरी में प्रोफेसर वेद घई की तरफ से लिखी गई किताब कश्मीर दर्पण का हिंदी में अनुवाद किया है। उन्होंने सात किताबों का डोगरी भाषा में उन्होंने अनुवाद किया है। अब तक डोगरी भाषा में उनके 40 रिसर्च पेपर प्रकाशित हो चुके हैं। उनके दिशा निर्देशन में 18 छात्रों ने पीएचडी व 28 छात्रों ने एमफिल की डिग्री ली है। उन्होंने डोगरी में पीएचडी, संस्कृत में एमफिल, डोगरी में ऑनर्स, संस्कृत में एमए किया है। साल 2018 में जम्मू कश्मीर विश्वविद्यालय में एचओडी डोगरी व पंजाबी विभाग से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं।
प्रोफेसर अर्चना केसर।