फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jammu News: तीन दिन बाद भी तीन जिलों की पुलिस के हाथ खाली

विज्ञापन
विज्ञापन
ज्यूल चौक हत्याकांड : सतवारी, बिक्रम चौक और दो आरएस पुरा क्षेत्र के रहने वाले चार आरोपियों की पहचान
विज्ञापन

पुलिस टीमों ने पंजाब तक बढ़ाया जांच का दायरा, कई जगह दबिश
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। ज्यूल चौक हत्याकांड में पुलिस हाथ खाली हैं। वारदात के तीन दिन बाद भी जम्मू, सांबा व कठुआ की तीन जिलों की पुलिस हत्यारोपियों को दबोच नहीं पाई। हालांकि, हत्यारोपियों की पहचान करने का दावा किया गया है, वह अभी भी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं।
सूत्रों के अनुसार आरोपियों में एक जम्मू के बिक्रम चौक, दूसरा सतवारी और दो अन्य सीमावर्ती आरएस पुरा क्षेत्र के हैं। इनमें से एक गांधी नगर पुलिस स्टेशन का बीते वर्ष ही हीस्ट्रीशीटर बना है। उस पर पहले भी मामले दर्ज हैं। इन शातिरों के सांबा या फिर साथ लगे पंजाब में होने की आशंका है। इसे देखते हुए पुलिस की कई टीमें सांबा, कठुआ और पंजाब के अमृतसर, गुरदासपुर क्षेत्र में दबिश दे रही हैं।
विज्ञापन

पुलिस ने कुछ संदिग्धों को पूछताछ के लिए उठाया जरूर है। उनसे आरोपियों के बारे जानकारी ली जा रही है। पुलिस टीमें सतवारी, आरएस पुरा और गांधी नगर में भी लगातार दबिश दे रही हैं।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट
इस पूरे मामले की जांच के बीच खौफ गैंग ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट अपलोड किया है। इसमें मृतक सुमित जंडयाल और उसके दो भाइयों का जिक्र किया गया है। तीनों के बारे कई तरह की बातें लिखी हैं। इसके पहले भी खौफ गैंग की तरफ से हत्या के तुरंत बाद एक पोस्ट साझा कर हमले की जिम्मेदारी ली थी। हालांकि, पुलिस की तरफ इन पोस्ट को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है।

गुम हो गया एंटी गुंडा स्क्वॉयड, पूर्व डीजीपी वैद ने कहा फिर से गठन करें
1990 में ऐसे ही स्क्वॉयड का गठन कर ढेर किए गए थे एक दर्जन गैंगस्टर, बदमाश
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू में गैंगस्टरों और बदमाशों पर कार्रवाई के लिए एंटी गुंडा स्क्वॉयड का गठन हुआ था, जो अब गुम हो चुका है। ये स्क्वॉयड 1990 में जम्मू के एसपी रहे पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने बनाया था। तब पुलिस ने एक दर्जन बदमाशों और गैंगस्टरों का एनकाउंटर किया था।
पूर्व डीजीपी वैद का कहना है कि ऐसा ही स्क्वॉयड फिर से बनना चाहिए। इसमें पुलिस के तेजतर्रार अफसरों को शामिल कर ऐसे गैंगस्टरों और बदमाशों का खात्मा करना चाहिए, जो माहौल खराब कर रहे हैं।
उक्त स्क्वॉयड 1990 से 2010 तक सक्रिय था, लेकिन बाद में ये हरकत में नहीं रहा। वैद का कहना है कि वे 1991 से 1993 तक एसपी सिटी रहे हैं। तब भी ऐसा ही माहौल था। रोज की तीन-चार वारदातें गैंगवार की होती थीं। तब हमने एंटी गुंडा स्क्वॉयड बनाया और कड़ी कार्रवाई की। मेरा मानना है कि ये स्क्वॉयड होना चाहिए। इसी से अपराधियों पर नकेल कसी जा सकेगी।

बीट अफसरों की चूक
बता दें कि हर एक थाने में पुलिस का बीट अफसर नियुक्त है। इनका काम ही अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय गैंगस्टरों, कुख्यात बदमाशों और अपराधियों की गतिविधियों की निगरानी करना है। लेकिन, एक वर्ष में गैंगवार और गैंगस्टरों की तरफ से पांच वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है। बीट अफसरों को इन कृत्यों का पता नहीं चल पाया।
विज्ञापन



डीआईजी का दावा, क्यूआरटी टीमें इसके बदले कर रही काम
एंटी गुंडा स्क्वॉयड के गठन या इसके निरस्त होने पर डीआईजी शिव कुमार का कहना है कि गुंडा स्क्वॉयड की जगह क्विक रिस्पांस टीमें (क्यूआरटी) बनी हैं, जो ऐसी गतिविधियों पर कार्रवाई करती है। ऐसे भी हर थाने की पुलिस इसे लेकर नजर रखती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें