जम्मू। किसी भी मामले में आगे की जांच का आदेश मजिस्ट्रेट दे सकता है, लेकिन दोबारा जांच की नहीं। दोबारा जांच का निर्देश देने की शक्ति उच्च न्यायालयों के पास है। ये टिप्पणी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए की।
न्यायमूर्ति ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निरोधक डोडा द्वारा 31 दिसंबर 2018 को पारित पुन: जांच के आदेश को कानून के तहत गलत मानते हुए उसे रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की प्रकृति और जांच एजेंसी (सतर्कता संगठन जम्मू) द्वारा की गई जांच की प्रकृति को देखते हुए न्यायालय निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की दृष्टि से वर्तमान मामले में नए सिरे से जांच के आदेश देता है। वर्तमान से दो माह की अवधि के भीतर, निदेशक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की देखरेख में जांच होगी और उक्त जांच की रिपोर्ट विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निरोधक, डोडा के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। वर्तमान मामले के तथ्य यह हैं कि पुलिस स्टेशन सतर्कता संगठन, जम्मू ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2006, 120-बी रणबीर दंड संहिता, बेईमानी और धोखाधड़ी वाले तरीकों से धन के दुरुपयोग के लिए 2013 एफआईआर दर्ज की। जेएनएफ