- केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जम्मू पीठ ने सुनाया फैसला
- कहा, सरकार की विफलता की वजह से याचिकाकर्ता के साथ हुआ अन्याय
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जम्मू पीठ ने एक मामले में सेवानिवृत्ति के 16 साल एक जेकेएएस अधिकारी को संशोधित चयन ग्रेड से वेतन और पेंशन देने का आदेश दिया है। साल 2009 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद अधिकारी का समायोजन जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) में किया गया था। उसके बाद भी उचित चयन ग्रेड के हिसाब से वेतन नहीं मिल रहा था। इसके बाद अधिकारी ने फिर से कोर्ट की शरण ली। जिस पर कैट ने उसे अब राहत दी है।
साल 1996 में जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक अधिकारी (राजपत्रित) सेवा का गठन किया गया था। याचिकाकर्ता कुंदन लाल महलदार को हकदार होने के बावजूद इस सेवा में समायोजित नहीं किया गया, जबकि उसके कनिष्ठ व्यक्तियों को सेवा में शामिल किया गया। इस पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट की शरण ली।
न्यायालय ने 12 सितंबर 2005 को मामले में फैसला सुनाते हुए सरकार को याचिकाकर्ता के मामले में पुनर्विचार करने का निर्देश दिया। इसका पालन करते हुए 23 अप्रैल 2009 को सरकार ने याचिकाकर्ता को जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा में शामिल करने का एक आदेश जारी किया। हालांकि आदेश में एक विशेष शर्त शामिल की गई, जिसके तहत याचिकाकर्ता को कोई भी मौद्रिक लाभ प्रदान नहीं किया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता ने फिर से न्यायालय की शरण ली। इसी बीच साल 2009 में ही याचिकाकर्ता रिटायर भी हो गया।
कर्मचारी को लाभों से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन
मामले में कैट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर किसी कर्मचारी को मिलने वाले लाभों से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। सरकार की विफलता की वजह से याचिकाकर्ता के साथ गंभीर अन्याय हुआ है। इस वजह से उसने सालों मुकदमेबाजी में बिताए हैं। इसी के साथ कैट ने याचिकाकर्ता के वेतनमान को फिर से निर्धारित करने और संशोधित वेतनमान के अनुसार गणना कर बकाया राशि का भुगतान करने आदेश दिया है। साथ ही संशोधित वेतनमान के हिसाब से ही याचिकाकर्ता की पेंशन शुरू करने का आदेश दिया है।