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Jammu News: खुले नाले, पब्लिक टॉयलेट की सफाई जैसी पांच चुनौतियां सामने

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क्या पूरी तैयारी है: स्वच्छता सर्वे की टीम इसी माह आ रही
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1.20 लाख घरों में से सिर्फ 90 से ही होती कूड़ा एकत्रित
खुले में बिखरा रहता है कचरा, दोपहर तक नहीं साफ होते डंपिंग साइट
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए दिल्ली से टीमें इसी माह जम्मू पहुंच रही हैं। सात पैरामीटर पर खरा उतरना नगर निगम के लिए चुनौती से कम नहीं है। हालांकि, 2023 में रैंकिंग 199 से गिरकर 248 हो गई थी। वहीं, 2020 में रैंकिंग 224 रही थी। यानी शहर में सफाई व्यवस्था इतनी बिगड़ी कि नगर निगम दो साल पहले की रैंकिंग के बराबर पहुंच गया।

ऐसा इसलिए हुआ कि नाले खुले पड़े हैं और सार्वजनिक शौचालयों की सफाई रामभरोसे है। डंपिंग साइट पर दिनभर कचरा बिखरा रहता है और दोपहर तक सफाई का काम चलता रहता है। अब टीमें शहरभर में हर पैरामीटर को चेक करेंगी और अपनी रिपोर्ट दिल्ली में शहरी विकास मंत्रालय में जमा करवाएंगी। हालांकि, नगर निगम ने चुनौतियों का सामना करने के लिए कसरत शुरू कर दी है।
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मौजूदा समय में शहर में डोर-टू-डोर कचरा एकत्रित करने की योजना 90 हजार घरों तक ही सीमित है। कुल 1.20 लाख घर हैं, जिनमें से अभी तक 30 हजार घरों से कचरा नहीं आ रहा है। यहां से कचरा खुले में या नालों और नालियों के किनारे फेंका जा रहा है। इससे नाले और नालियां अवरुद्ध हो रही हैं। शहरभर में ऑटो की सुविधा कचरा एकत्रित करने के लिए दी गई है।
इसकी एवज में घरों से 100 रुपये वसूल किया जाता है। कचरा ऑटो में न फेंकने के कारण सड़कों के किनारे डंप होता रहता है। दोपहर बाद ही ठिकाने लगता है। इससे राहगीरों को परेशानी होती है और सफाई कर्मचारियों को कचरा एकत्रित करने में दिक्कत आती है।

सात पैरामीटर और स्वच्छता का सच
1. डोर-टू डोर कचरा प्रबंधन : शहर में डोर-टू डोर कचरा प्रबंधन शत-प्रतिशत होना चाहिए। मौजूदा समय में 30 हजार घर नहीं जुड़े हैं। कचरा खुले में फेंका जा रहा है

2. ठोस कचरा निपटान प्रबंधन : कोटभलवाल में कचरा संयंत्र केंद्र का निर्माण कार्य चल रहा है। पैरामीटर पर खरा उतरने के लिए नगर निगम के पास अपना कचरा संयंत्र केंद्र होना जरूरी है, जहां पर कचरे का निस्तारण हो सके। ऐसा नहीं हो रहा है

3. व्यक्तिगत शौचालय : व्यक्तिगत शौचालय शहर में शत प्रतिशत होने जरूरी हैं, लेकिन शहर की निजी कॉलोनियां में शौचालयों की व्यवस्था नहीं है। कई बार नगर निगम झुग्गियों को हटा चुका है

4. स्वच्छता प्रचार : कचरा एकत्रित करने वाले ऑटो के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है। इसके अलावा बड़े स्तर पर लोगों को स्वच्छता के लिए जागरूक करने को लेकर नगर निगम कोई भी बड़ा अभियान नहीं चला पाया है। अंतिम बार कार्यक्रम 2023 में हुए थे

5. नदियों का पानी साफ हो : शहर के नालों का पानी नदी में गिरता है। इन नालों को डायवर्ट करने की योजना पर काम हो रहा है। नाले-नालियों की हालत खराब है। नालियों में सीवरेज की गंदगी गिरती है

6. पॉलीथिन पर पाबंदी : प्रतिबंध के बावजूद शहर में पॉलीथिन का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। खाने से लेकर दूध व अन्य सामान पाॅलीथिन में पैक कर बेचा जा रहा है। नगर निगम की टीम जुर्माना करने तक सीमित रहा है

7. खुले में कचरा न फेंकना : शहर में आज भी कई इलाकों में खुले में कचरा फेंका जा रहा है। इसके लिए जगह-जगह कूड़ेदान की व्यवस्था होनी चाहिए


जम्मू शहर की रैंकिंग
वर्ष रैंकिंग
2023 248
2022 199
2021 169
2020 224
2019 329


पुराने बस स्टैंड परिसर में गंदगी का आलम है। यहां माह में एक ही बार सफाई होती है। नालियां अवरुद्ध हैं। बारिश में पानी सड़कों पर आता है। बस स्टैंड के पास दोपहर तक कचरा उठता है।
- रमेश टाक, प्रधान, बस स्टैंड


2018 से लेकर 2023 तक वह मेयर रहे। इस दौरान स्वच्छता रैंकिंग को 329 से 199 तक पहुंचाया। इस दौरान हर पॉइंट पर सफाई करवाई गई है।
- चंद्र मोहन गुप्ता, पूर्व मेयर


बाहु फोर्ट इलाके में भी सफाई चरमरा गई है। रैंकिंग में सुधार के लिए समय पर डंपिंग साइट से कचरा उठाना चाहिए। अभी तक दावे ही हो पाए, हकीकत में कुछ नहीं।
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- गौरव चोपड़ा, पूर्व पार्षद


स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग में सुधार किया जा रहा है। शहर में नाले, नालियों को साफ करवाया गया है। इसके अलावा अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसी माह टीम के आने की संभावना है।
- डॉ. विनोद शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
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