जम्मू-कश्मीर के राजस्व गांवों के भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की
कहा, सटीकता का आकलन करने के लिए राजस्व विशेषज्ञों की टीमें जिलों का दौरा करेंगीअमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीएलएलआरएमपी) के तहत जम्मू-कश्मीर के राजस्व गांवों के भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने को कहा है। इन अभिलेखों की गुणवत्ता और सटीकता की जांच करना महत्वपूर्ण है। राजस्व विशेषज्ञों की टीम गठित की जाएं, जो डिजिटलीकृत अभिलेखों की सटीकता का आकलन करने के लिए जिलों का दौरा करें।
मुख्य सचिव ने बुधवार को विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर डीएलएलआरएमपी के तहत जम्मू-कश्मीर के राजस्व गांवों के भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा लोगों को किसी भी विसंगति के लिए संबंधित अभिलेखों की जांच करने में खुद आगे आना चाहिए ताकि इन्हें समय पर ठीक किया जा सके।
डिजिटल रूप से पारदर्शी भूमि अभिलेख भूमि संसाधनों के अनुकूलन और नीति व योजना में सहायता के लिए विभिन्न एजेंसियों के साथ सूचना साझा करने की सुविधा प्रदान करते हैं। सार्वजनिक सेवा वितरण की प्रभावशीलता और दक्षता बढ़ाना जरूरी है। भूमि अभिलेखों तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए डिजिटलीकृत अभिलेखों को भू-संदर्भित कैडस्ट्रल मानचित्रों के साथ एकीकृत करना आवश्यक है।
बताया गया कि राजस्व विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली अधिकांश सेवाएं लोक सेवा गारंटी अधिनियम (पीएसजीए) के तहत गारंटीकृत हैं। मुख्य सचिव ने आवेदनों को अंतिम समय में वापस करने या रद्द करने पर नियंत्रण रखने के लिए कहा।
6839 गांवों में जमाबंदियों का डिजिटलीकरण पूरा
बैठक में डीआईएलआरएमएस के तहत अब तक की प्रगति और भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों पर प्रकाश डाला गया। बताया गया कि डीआईएलआरएमपी के तहत 6850 गांवों में से 6839 में जमाबंदियों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। वेक्टराइज्ड विलेज मैप्स के संबंध में बताया गया कि वेक्टराइज्ड मैप्स और जियो रेफरेंस्ड गांवों की संख्या क्रमशः 6518 और 6261 है। यह पता चला कि विभाग वर्तमान में इन अभिलेखों की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन प्रक्रिया में लगा हुआ है।