इस पर आयुक्त पंकज मंगोत्रा ने कहा कि सिस्टम को ठीक किया जाएगा। लापरवाही पर जांच करवाई जाएगी। उसके बाद निर्दलीय विधायकों ने बजट नहीं मिलने के मुद्दे पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब दस मिनट तक चले प्रदर्शन में निर्दलीय पार्षद और भाजपा पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक चलती रही। काफी मुश्किल से मामले को शांत किया गया।
उसके बाद वार्ड 46 के निर्दलीय पार्षद द्वारका चौधरी ने कहा कि विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। टेंडर प्रक्रिया के आगे काम नहीं हो रहा है। प्रीत नगर समेत अन्य जगहों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। लाइटें फ्यूज हैं। लोग परेशानी का सामना कर रहे हैं।
भाजपा पार्षद राजिंद्र शर्मा ने भी ठेके पैटर्न पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसमें संशोधन की जरूरत है। राजिंद्र ने कहा कि मौजूदा समय में टेंडरिंग प्रक्रिया 2014 के नियमों के अनुसार हो रही है। उस समय ट्राली के रेट 800 रुपये था और अब 3 हजार के करीब है। इसमें ठेकेदार को पैसा ही नहीं बेचेगा तो विकास कार्य कैसे सिरे चढ़ेगा। ऐसे में भ्रष्टाचार तो बढ़ेगा ही। टेडरिंग प्रक्रिया में सुधार लाया जाए। इससे ठेकेदार काम करने में रुचि लेंगे और वार्डों में काम हो सकेंगे।
इस पर आयुक्त ने इस प्रक्रिया बदलाव लाने का भरोसा दिया। उसके बाद राजिंद्र ने यह भी सवाल उठाया कि जेएमसी के कितने फ्लैट हैं। इसके बाद सवालों के जवाब पर अन्य पार्षदों ने अधिकारियों को घेर लिया। हंगामा काफी बढ़ गया।
इस बीच भाजपा पार्षद पवन शर्मा ने मेयर और आयुक्त को भ्रष्टाचार मामले पर घेर लिया। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे कामों के लिए भी पैसा लिए जा रहे हैं। इस आरोप पर आयुक्त ने कहा कि यदि इसके सबूत और कर्मचारी का नाम है तो उन्हें बुलाया जाए। लेकिन ऐसे किसी भी व्यक्ति को बुलाया नहीं गया। इस आरोप पर मेयर ने सफाई दी कि पार्षद व्यक्तिगत रंजिश में आरोप लगा रहे हैं। बैठक को अगले महीने तक के लिए स्थगित किया जाता है और मेयर हाउस छोड़ कर चले गए।