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Jammu News: सदन से सड़क तक गूंजा नई बस्ती में तोड़ी जाने वाली दुकानों का मुद्दा

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भाजपा विधायक विक्रम रंधावा और नरेंद्र रैना ने कहा-सरकार जब तक दुकानदारों को जमीन नहीं देती, दुकानों को तोड़ने का नोटिस रद्द किया जाए
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सतवारी की नई बस्ती में फ्लाईओवर बनाने के लिए तोड़ी जाने वाली दुकानों का मुद्दा शनिवार को विधानसभा से लेकर सड़क तक गूंजा। भाजपा विधायकों ने सदन में यह मुद्दा उठाया। विधायकों ने कहा कि जब तक दुकानदारों को दुकानों के एवज में जमीन नहीं दे दी जाती, तब तक के लिए इनको तोड़ने का नोटिस रद्द किया जाए। वहीं, दुकानदारों ने नोटिस रद्द किए जाने की मांग को लेकर नई बस्ती में हंगामा किया। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि उन्हें जो आश्वासन दिया गया था, उसे सरकार ने पूरा नहीं किया।
भाजपा विधायकों ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही यह मुद्दा उठाया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने उन्हें प्रश्नकाल के बाद अपनी बात रखने के लिए कहा। शून्यकाल के दौरान भाजपा विधायकों ने फिर यह मुद्दा उठाया और कहा कि सरकार इस मामले में अपना स्पष्टीकरण दे। हालांकि, अध्यक्ष ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि बिना पूर्व सूचना के मंत्री किसी भी विधायक के सवालों का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं होता है।
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अनुदान मांग पर बहस के पहले इस मुद्दे को भाजपा विधायकों ने फिर उठाया और पोस्टर लेकर वेल तक पहुंच गए। भाजपा विधायक विक्रम रंधावा और नरेंद्र रैना ने कहा कि नई बस्ती में 39 दुकानों को एक सप्ताह में खाली करने का नोटिस दिया गया है। कहा, सरकार के साथ दुकानदारों की दस चरण की बैठक हुई थी। दुकानदारों को आश्वासन दिया गया था कि पहले उन्हें वैकल्पिक भूमि दी जाएगी, उसके बाद ही दुकानों को तोड़ा जाएगा।
विधायक नरेंद्र रैना ने कहा कि उपराज्यपाल प्रशासन ने दुकानदारों को चंद्रभागा (भगवती क्षेत्र) में दुकानें बनाने के लिए जमीन दी थी, लेकिन अब तक उन्हें नहीं मिली। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को इस मुद्दे से अवगत करवाया गया, लेकिन कोई पहल नहीं हुई। इस बीच विधायक विक्रम रंधावा ने पोस्टर दिखाकर सरकार को ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि दुकानों में सामान पड़ा है, अगर सरकार उन्हें वैकल्पिक भूमि नहीं देती है, तो वहां किसी तरह की कार्रवाई भी नहीं होनी चाहिए।
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विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि नई बस्ती में फ्लाईओवर बनना है। लेकिन, सरकार ने उन्हें वैकल्पिक भूमि के दस्तावेज नहीं दिए हैं। अगर सरकार लोगों को हक नहीं देगी तो हम उनके साथ सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे। सरकार से लड़ेंगे और नोटिस रद्द किए जाने की मांग करेंगे।
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