पर्यटन राज्य होने के बावजूद पर्यटन नीति का अभाव झेल रहे जम्मू-कश्मीर को शीघ्र ही राहत मिलने वाली है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले पर्यटन क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने के लिए उपराज्यपाल प्रशासन पहली बार नीति बनाने जा रहा है।
पर्यटन विकास विभाग नीति का मसौदा तैयार कर रहा है। इसे आगामी वैश्विक निवेशक सम्मेलन में पेश किया जाएगा। अगले दो दशक की संभावनाओं और क्षमताओं पर आधारित नीति में फिल्म टूरिज्म, ईको टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, हेल्थ एंड वेलनेस टूरिज्म, हेरिटेज टूरिज्म आदि को शामिल किया जाएगा।
नई नीति में कोशिश की जा रही है कि 70-80 के दशक के फिल्म टूरिज्म को वापस लाया जाए। इसके लिए कई अभिनेताओं को ब्रांड अंबेसडर बनाकर जम्मू-कश्मीर में फिल्म और दूसरे पर्यटन का प्रमोशन कराने की योजना है। पर्यटन के विभिन्न क्षेत्रों में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन (इंसेंटिव) देने पर भी विचार किया जा रहा है।
नए सिरे से तैयार किए जा रहे मसौदे में जम्मू और कश्मीर के नए संभावित पर्यटन स्थलों में भी पर्यटकों को खींचने का काम किया जाएगा। नई नीति बनाने के लिए पर्यटन विभाग से कई सुझाव मांगे गए हैं। पर्यटन नीति को मजबूत बनाने के लिए एक एजेंसी की मदद ली जा रही है। इसमें दूसरे राज्यों की तर्ज पर बेहतर पर्यटन नीति बनाने पर काम किया जा रहा है।
तीन वर्ष पहले भी तैयार हुआ था ड्रॉफ्ट
सूत्रों के अनुसार तीन वर्ष पूर्व पर्यटन नीति का एक ड्राफ्ट तैयार किया गया था जिस पर कोई फैसला नहीं लिया जा सका।
प्रदेश की पर्यटन नीति के लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। अन्य राज्यों और प्रदेशों की पर्यटन नीति को ध्यान में रखकर नीति बनने से प्रदेश में पर्यटन विकास को और रफ्तार दी जा सकेगी।
- दीपिका के शर्मा, निदेशक पर्यटन विकास विभाग, जम्मू