अलगाववादी संगठनों (जेआरएल) ने नौगाम में हिजबुल कमांडर सब्जार अहमद व उसके उसके साथी आसिफ अहमद के मारे जाने के विरोध में वीरवार को बंद का आह्वान किया है। जेआरएल के नेताओं सैय्यद अली गीलानी, मीरवाइज उमर फारुक और यासीन मलिक ने लोगों से शुक्रवार को भी प्रदर्शन करने के लिए कहा है।
सब्जार इस साल मारे जाने वाला चौथा सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा आतंकवादी
हिजबुल कमांडर सब्जार अहमद सोफी सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा जाने वाला इस साल का चौथा सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा आतंकी है। उसने बुरहान अहमद वानी के मारे जाने के बाद 2016 में आतंकी संगठन ज्वाइन किया था। इस माह के पहले पखवाड़े में कुपवाड़ा जिले में सुरक्षा बलों ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व स्कालर मन्नान वानी को मार गिराया था। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का शोधार्थी रह चुका था।
इससे पहले कश्मीर विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर मोहम्मद रफी भट्ट को आतंकी बनने के दो दिन बाद शोपिया जिले में ढेर कर दिया गया था। एक अन्य आतंकी एसा फजली जो बाबा गुलाम शाह बादशाह विश्वविद्यालय का इंजीनियरिंग छात्र भी इसी साल सुरक्षाबलों की गोली का शिकार बना था। तहरीक-ए-हुर्रियत के अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ सेहराई का का बेटा व एमबीए छात्र जुनैद अशरफ सेहराई ने अक्तूबर में ही आतंकी संगठन ज्वाइन कर लिया था। उसकी फोटो सोशल मीडिया में वायरल हुई थी।
आतंकी सब्जार सोफी ने वर्ष 2013-14 में भोपाल की बरकल उल्ला विश्वविद्यालय से एमएससी किया था। इसके बाद ग्वालियर स्थित जीवाजी विवि से एमफिल करने के बाद नीट और जेआरएफ की परीक्षा पास की। 2016 में पीएचडी में प्रवेश लिया। इसके बाद लोक संघ सेवा आयोग की परीक्षा पास करने के लिए कोचिंग शुरू की। बताया जा रहा है कि सोफी ने नैना इलाके में गरीब बच्चों को भी पढ़ना शुरू किया था। बुरहान बानी के मारे जाने के बाद वह घर से लापता हो गया था। तीन महीने बाद घर वालों को उसके आतंकी संगठन ज्वाइन करने का पता चला था।
आतंकी सब्जार जामिया का छात्र नहीं
कश्मीर में मारा गया आतंकी सब्जार अहमद सोफी जामिया मिल्लिया इस्लामिया का छात्र नहीं है। जामिया प्रबंधन का कहना है कि रिसर्च विभाग के रिकॉर्ड में उक्त नाम का कोई छात्र नहीं है। आतंकी का नाम जामिया के पूर्व छात्र के रूप में जोड़ने से जामिया का नाम खराब हुआ है।
जामिया प्रबंधन के मुताबिक, जामिया में बॉटनी विभाग ही नहीं है तो हम बॉटनी में पीएचडी की पढ़ाई कैसे करवा सकते हैं? जामिया प्रबंधन ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर पीएचडी छात्रों का रिकॉर्ड जांचा है। साथ ही बायो साइंस, बायो टेक्नोलॉजी व अंतर विभाग रिसर्च के छात्रों के नाम की वर्तमान व पूर्व छात्रों के नाम की सूची भी जांची है। इसके तहत उक्त नाम का कोई पीएचडी या रिसर्च में छात्र रजिस्टर्ड नहीं है। जामिया ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से बिना सत्यापन किसी भी आतंकी का नाम विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र के रूप में न जोड़ने की अपील की है।