पाकिस्तान सरहद पर सीजफायर की आड़ में भारत के खिलाफ ड्रोन वार चला रहा है। साजिश के तहत आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-ताइबा को आगे करके पाकिस्तानी सेना और आईएसआई आतंकी साजिशों को अंजाम देने की कोशिश में हैं। पीओके में आतंकियों को ड्रोन से हमले का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जानकारों की मानें तो चीन भी इसमें पाकिस्तान की मदद कर रहा है।
जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह के अनुसार जम्मू के वायुसेना स्टेशन पर ड्रोन हमला आतंकियों ने किया। इसमें आईएसआई और पाकिस्तानी सेना का भी हाथ है। एडीजीपी मुकेश सिंह ने बताया कि शुक्रवार को अखनूर में मार गिराए ड्रोन को आईईडी के साथ जैश आतंकियों की ओर भेजने का अंदेशा है। जैश और लश्कर को आईएएसआई और पाकिस्तानी सेना पाल पोस रही है।
अखनूर में मार गिराए ड्रोन के पार्ट्स के सीरियल नंबर कठुआ में मिले ड्रोन के पार्ट्स से जुड़े हैं। इसके अलावा ड्रोन से मिले धागे जम्मू एयरफोर्स स्टेशन पर ड्रोन हमले के बाद मिले सबूतों से मेल खा रहे हैं। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर एलओसी तक पाकिस्तानी सेना की मदद से ड्रोन हमले की साजिश रची जा रही है।
एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी बताया है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को अब नए तरीके से अंजाम देना शुरू कर दिया है। डेढ़ साल में ड्रोन के जरिए आतंकियों ने 40 से अधिक बार हथियार, गोला बारूद, नकदी और ड्रग्स गिराए। जम्मू, सांबा, कठुआ जिले के पाकिस्तान जाने वाले नदी-नालों का इस्तेमाल करके इनके ऊपर से ड्रोन भेजे जा रहे हैं। उज्ज, बसंतर, तवी नदी, चिनाब जैसी प्रमुख नदियां और दरिया सीधे पाकिस्तान जाते हैं। पहले इनके जरिए आतंकियों को भेजा जाता था। अब ड्रोन से हथियार और गोला बारूद भेजे जा रहे हैं।
रिटायर्ड कर्नल वीके साही बताते हैं कि सीजफायर उल्लंघन पर पाकिस्तान को बड़ा नुकसान पहुंच रहा था। उसकी अधिकतर चौकियां नष्ट कर दी गई थीं। इसलिए पाकिस्तान ने संघर्ष विराम कर दिया। कश्मीर में आतंकी हमले भी नहीं कर पा रहे। आतंकी तंजीमों के पास साधन नहीं बचे हैं। पाकिस्तान अपने नेटवर्क को दुरुस्त करने के लिए सीजफायर की आड़ में ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। ड्रोन पकड़े जाने से उसे केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है।