चोरी और पुराना ढांचा बड़ी वजह
विद्युत विकास विभाग के उप सचिव समिंदर सिंह के अनुसार प्रदेश में अधिक लाइन लॉस की सबसे बड़ी वजह कमजोर तार, पुरानी लाइनें और कई इलाकों में जारी बिजली चोरी है। विभाग का कहना है कि खराब तारों को बदला जा रहा है, टूटे खंभों की मरम्मत हो रही है और ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई जा रही है।
कई फीडरों को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि तकनीकी नुकसान कम हो सके। घाटे वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष टीमें बनाई गई हैं जो तकनीकी और वाणिज्यिक दोनों तरह के नुकसान पर नजर रख रही हैं। चोरी रोकने और सही खपत का डेटा प्राप्त करने के लिए कई इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। हाई वोल्टेज सिस्टम का विस्तार भी किया जा रहा है, जिससे लंबी दूरी में होने वाला नुकसान कम किया जा सके।
केंद्र रख रहा राज्यों की स्थिति पर नजर
केंद्र सरकार भी वोल्टेज प्रबंधन सुधारने के लिए स्काडा और ऊर्जा प्रबंधन तकनीक का उपयोग बढ़ा रहा है। राज्यों को अपने ढांचे को मजबूत करने के लिए तकनीकी और आर्थिक सहायता भी दी जा रही है ताकि लाइन लॉस पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके। देश के कई अन्य राज्यों में भी लाइन लॉस की स्थिति देखी गई है, लेकिन जम्मू कश्मीर की तुलना में यह काफी कम है। दिल्ली में लाइन लॉस 15.13 फीसदी, हरियाणा में 17.96, राजस्थान में 22.85, उत्तर प्रदेश में 19.02, बिहार में 21.54, झारखंड में 19.27 और त्रिपुरा में 28.70 फीसदी दर्ज किया गया है।