चिकित्सा कर्मचारियों की हड़ताल से शहर के बत्रा (एस्कॉम) अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। अस्पताल की इमरजेंसी में कोई नया मरीज नहीं लिया जा रहा। ओपीडी सहित सर्जरी भी बंद है। अस्पताल के आसपास बसी हजारों की आबादी को चिकित्सा सुविधाओं के लिए जीएमसी और अन्य एसोसिएटेड अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। कोरोना महामारी के दौरान बत्रा अस्पताल प्रमुख रूप से संक्रमित मरीजों की देखभाल करता रहा।
कोविड की तीसरी लहर की आशंका से पहले अस्पताल में ऐसे हालात चिंताजनक हैं। फिलहाल अस्पताल में इमरजेंसी में पहले से भर्ती मरीजों का ही इलाज किया जा रहा है, इसके लिए कुछ स्टाफ नियुक्त किया गया है। शुक्रवार को भी अस्पताल के कर्मचारियों ने मांगों को लेकर धरना जारी रखा। एस्कॉम इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन जम्मू के बैनर तले कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
उन्होंने बताया कि कोविड के दौरान पूरी निष्ठा के साथ अस्पताल के चिकित्सा व अन्य दूसरे कर्मचारियों ने सेवाएं दीं। लेकिन अस्पताल प्रबंधन समझौते के तहत उनकी मांगों पर गौर नहीं कर रहा। वर्ष 2017 में इंडस्टीरियल ट्रिब्यूनल लेबर कोर्ट जम्मू ने भी कर्मचारियों के हक में फैसला दिया था। कोविड महामारी के दौरान ड्यूटी देते एक सीनियर कर्मचारी की मौत हुई है।
यह भी पढ़ें- गुलमर्ग जमीन घोटाला: कश्मीर के पूर्व संभागीय आयुक्त महमूद इकबाल के घर सीबीआई का छापा
पदोन्नति और वेतन वृद्धि की मांग
कर्मचारी पदोन्नति और वेतन वृद्धि की मांग कर रहे हैं। इसके साथ 1-8-2019 से कर्मचारियों को एरियर जारी करने की भी मांग है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि अगस्त 2019 में अन्य कई मांगों पर अस्पताल प्रबंधन के साथ एमओयू हुआ था, लेकिन इस पर काम नहीं हुआ। चेतावनी दी कि मांगें पूरी करने के साथ वरिष्ठ कर्मचारियों को सेवा लाभ न देने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इमरजेंसी में ड्यूटी पर लगे कुछ स्टाफ कर्मी भी अपनी ड्यूटी के बाद प्रदर्शन में शामिल हुए।
चिकित्सा सेवाएं प्रभावित : अधीक्षक
एस्कॉम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. रवींद्र रतनपाल ने कहा कि कर्मचारियों की हड़ताल से चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुई हैं। सभी कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से इमरजेंसी में पहले से ही भर्ती मरीजों को इलाज दिया जा रहा है।