सिंधु नदी के बहते पानी के साथ ही गांदरबल जिले की कंगन विधानसभा की सियासी धारा तेज बह रही है। अमरनाथ यात्रा वाले मुख्य मार्ग पर स्थित वुसन कस्बे में बैठे लोग चर्चा के बीच चुनाव परिणाम पर भी आश्वस्त हो रहे हैं।
उनका कहना है कि नेकां के टिकट पर सूफी परिवार की चौथी पीढ़ी इस बार हमारे बीच है। आगे बढ़ने पर कंगन बाजार में पीडीपी के समर्थक जुटे हैं। उनका कहना है कि पिछली बार महज 432 मतों से हार हुई थी। इस बार परिणाम बदला नजर आएगा।
अखरोट की खेती वाले कंगन क्षेत्र में बिजली अहम मुद्दा है। यहां तीन पॉवर प्लांट स्थापित हैं और कश्मीर के ज्यादातर इलाकों में इन्हीं के जरिये बिजली आपूर्ति होती है। मगर, इस इलाके को पूरी बिजली नहीं मिल रही है।
यही कारण है कि मैदान में उतरे प्रत्याशी इस मुद्दे पर जनता के बीच हैं। नेकां ने अनंतनाग से सांसद और कंगन से अपराजेय रहे पूर्व मंत्री मियां अल्ताफ के बेटे मियां मेहर अली को मैदान में उतारा है। उनके खिलाफ पीडीपी ने सैयद जमात अली शाह शाहीन पर दांव लगाया है।
इसके अलावा छोटे दल और निर्दलीय भी मैदान में हैं। कंगन बाजार में बड़े किसान मियां गुलदार अहमद का कहना है कि भाजपा सरकार ने हमारा जंगल छीन लिया और उसकी नीति के कारण कश्मीरी सेब की मांग कम हुई है। वुसन के शकील अहमद बताते हैं कि अमरनाथ यात्रियों की खिदमत करके हम अपनी रोजी-रोटी चलाते थे।
श्राइन बोर्ड बनने के बाद हमारे रोजगार चले गए। सड़क चौड़ीकरण में खेत खत्म हो गए। नाराज बशीर अहमद का कहना है कि 50 साल से ज्यादा समय से एक ही परिवार के घर पर विधायकी है। इसका नुकसान भी हमारे इलाके को हुआ है।
गुज्जर बकरवाल समुदाय में है मियां परिवार की पैठ
नेकां प्रत्याशी मियां मेहर अली परिवार का क्षेत्र के गुज्जर और बकरवाल बिरादरी में खासी पैठ है। सबसे पहले उनके परदादा मियां निजामुद्दीन यहां से विधायक बने थे। इसके बाद वर्ष 1967 से 1987 तक दादा मियां बशीर अहमद ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
सांसद अल्ताफ ने पिता की विरासत संभाली और वर्ष 2014 तक जीत दर्ज की। खास बात यह है कि मियां निजाम उद दीन लारवी, मियां बशीर अहमद लारवी और मियां अल्ताफ अहमद राजनीति में कदम रखने के बाद से कभी कोई चुनाव नहीं हारे।
उम्मीदवार
मेहर अली (नेकां)
सैयद जमात अली (पीडीपी)