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Jammu : सात वर्ष बाद एलओसी पर पाकिस्तानी सेना का पुराना पैंतरा, भारतीय जवानों पर स्नाइपर हमले; एक आशंका यह भी

Sun, 16 Feb 2025 03:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

]भारतीय जवानों को स्नाइपर से निशाना बनाया जा रहा है। एक हफ्ते के भीतर ऐसी दो वारदात सामने आने से सेना सतर्क हो गई है। एलओसी पर तैनात जवानों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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loc, file - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सेना सात वर्ष बाद फिर पुराना पैंतरा आजमा रही है। भारतीय जवानों को स्नाइपर से निशाना बनाया जा रहा है। एक हफ्ते के भीतर ऐसी दो वारदात सामने आने से सेना सतर्क हो गई है। एलओसी पर तैनात जवानों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

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बीते वर्षों में पाकिस्तानी सेना ने स्नाइपरों की रेंज भी 2000 मीटर से 2500 मीटर तक बढ़ा दी है। ये भी संभव है कि हमलों में आतंकी भी शामिल हैं। क्योंकि पाकिस्तानी सेना ने लश्कर के आतंकियों को इसकी ट्रेनिंग दे रखी है।

सूत्रों की मानें तो पाकिस्तानी सैनिक ऑस्ट्रिया, यूएस और जर्मनी से बनी 2 हजार मीटर तक मार करने वाली स्नाइपर राइफलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वर्ष 2017 और 2018 में भी बड़े स्तर पर पाकिस्तानी सैनिकों और रेंजरों ने स्नाइपर हमले किए थे। एलओसी पर तैनात पाकिस्तानी सैनिकों और रेंजरों के पास अधिकतर 2 हजार मीटर और न्यूनतम 800 मीटर दूरी पर मार करने वाली स्नाइपर राइफलें हैं। 
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ऐसी चार राइफलें हैं। इनमें रेंज मास्टर- 50(2000 मीटर), यूएसए निर्मित, बैरेट एम- 82(1800 मीटर) यूएसए निर्मित, रैमिंगटन माड्यूलर (1500 मीटर) यूएसए, एसटीईवाईआर- 69(800 मीटर) ऑस्ट्रिया शामिल हैं। 15 साल पहले पाकिस्तानी सेना 300 मीटर तक मार करने वाली स्नाइपरों का इस्तेमाल करता थी। जिसकी रेंज 2000 मीटर से 2500 मीटर तक पहुंच चुकी है।

पूर्व बिग्रेडियर विजय सागर का कहना है कि पाकिस्तानी सेना हमेशा से ही आमने सामने की लड़ाई लड़ने में असमर्थ रही है। किसी न किसी तरह से वे तनाव पैदा करने का प्रयास करती है। भारतीय सैनिकों को इससे सतर्क रहना चाहिए।

एक हफ्ते में दो वारदात

  • 10 फरवरी को नौशेरा में भारतीय जवान स्नाइपर हमले में घायल
  • 12 फरवरी अखनूर एलओसी पर सेना का जवान स्नाइपर हमले में घायल हो गया

दो वर्षों में 30 से अधिक बलिदान
दो वर्षों में 30 से अधिक जवान बलिदान हो गए थे । 2017 में स्नाइपरों के हमलों में एलओसी और बार्डर पर 18 से अधिक जवान बलिदान हो गए। 2018 में भी स्नाइपर हमलों में इतने ही सैन्य अफसरों समेत जवान बलिदान हुए। 11 नवंबर 2018 को नौशेरा में जवान शहीद हुआ। 21 दिसंबर 2018 कुपवाड़ा में दो सैन्य अफसर शहीद हो गए। 26 नवंबर 2018 कुपवाड़ा में सैन्य जवान घायल हो गया। 2019 में 15 जनवरी को हीरानगर में बीएसएफ जवान बलिदान हो गया था।

आतंकियों को पाकिस्तानी सेना ने दी स्नाइपर की ट्रेनिंग
जानकारी के अनुसार पाकिस्तानी सेना के कैंपों में लश्कर ए तैयबा के आतंकियों को स्नाइपर की ट्रेनिंग दी जा रही है। आतंकियों के पास यूएसए और ऑस्ट्रिया निर्मित स्नाइपर हैं। पुंछ, राजोरी, कुपवाड़ा, बारामुला की एलओसी, जम्मू, सांबा और कठुआ के बार्डर पर आतंकी घुसपैठ नहीं कर पा रहे। खासकर जम्मू संभाग में आतंकियों की घुसपैठ बहुत कम हुई है। इसे देखते हुए आतंकी पाकिस्तान की फारवर्ड पोस्टों तक पहुंचे हैं। वह पाकिस्तानी सैनिकों के साथ मिलकर भारतीय जवानों को टारगेट कर रहे हैं।

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