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जमात-ए-इस्लामी के आर्थिक स्रोत बंद करने में जुटी सरकार, अब तक 70 से अधिक बैंक एकाउंट सील

Mon, 04 Mar 2019 10:28 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
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- फोटो : फाइल
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जम्मू-कश्मीर में सरकार अब जमात-ए-इस्लामी के आर्थिक स्रोत को बंद करने में जुटी है। इस पहल के तहत उसके सभी बैंक एकाउंट का पता लगाकर उसे सील किया जा रहा है। अब तक 70 से अधिक बैंक एकाउंट सील किए जाने की सूचना है।
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दरअसल, जमात-ए-इस्लामी पर पाकिस्तान के इशारे पर घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग करने और अन्य प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराने के पुख्ता सबूत मिले। उसके बाद केंद्र सरकार ने संगठन पर पाबंदी लगाई। सरकार के पास इस बात की सूचना है कि यह संगठन घाटी में अलगाववाद तथा आतंकवाद को बढ़ाने में मदद कर रहा है। इसके लिए हवाला के जरिये उसके पास पैसे पहुंच रहे हैं। इसलिए सरकार ने उसके आर्थिक स्रोतों को बंद करने में जोरशोर से जुटी हुई है।

सूत्रों ने बताया कि जमात आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन और हुर्रियत कांफ्रेंस के गठन के लिए जिम्मेदार है। यह संगठन लंबे समय से अलगाववाद एवं पाकिस्तान समर्थित एजेंडे के तहत राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए अलगाववाद एवं आतंकवादियों को सहयोग दे रहा है। सूचना है कि जमात आतंकी संगठन हिजबुल तथा लश्कर में युवाओं की भर्ती के लिए फंडिंग भी करता रहा है। कट्टरपंथी को बढ़ावा देने के लिए युवाओं में अलगाववाद की भावना भरता है। 
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पहले दो बार लग चुका है प्रतिबंध
जमात-ए-इस्लामी का गठन 1945 में हुआ था। राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के कारण इस पर पहले भी दो बार 1975 और 1990 में प्रतिबंध लगाया जा चुका है। पहली बार दो साल तथा दूसरी बार तीन साल के लिए संगठन को प्रतिबंधित किया गया था। 

घाटी में जमात के प्रतिबंध पर जताई आपत्तियां
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती तथा उमर अब्दुल्ला ने जमात पर प्रतिबंध लगाए जाने की निंदा करते हुए कहा था कि इस फैसले पर केंद्र को पुनर्विचार करना चाहिए। महबूबा ने कहा था कि प्रतिबंध प्रतिशोध की कार्रवाई है। इसके नतीजे खतरनाक होंगे। वहीं उमर ने कहा था कि जमात पर प्रतिबंध का कश्मीर में गहरा सामाजिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इसकी तरफ से संचालित स्कूलों तथा मस्जिदों को सील करने के फैसले की तत्काल समीक्षा करने की अपील की थी। इसके अलावा सीपीआई (एम) व अन्य संगठनों ने भी इस फैसले का विरोध किया।
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