- वर्षों पहले बने पांच हजार आवास जर्जर हो चुके, छतों से टपकता है पानी
- सीवर लाइन और वाटर सप्लाई भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है
- राहत एवं पुनर्वास विभाग ने 85 करोड़ रुपये का बनाया है प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सालों पहले विस्थापित कश्मीरी पंडितों को मुहैया कराए गए आशियानों के दिन बहुरने वाले हैं। जर्जर हो चुके भवनों की मरम्मत के लिए राहत एवं पुनर्वास विभाग ने 85 करोड़ का बजट बनाया है। विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेजी जा चुकी है। लोक निर्माण विभाग को इस वित्तीय वर्ष में इसे अपने बजट में शामिल करने का आदेश दिया गया है। हरी झंडी मिलते ही व्यापक स्तर पर नवीनीकरण का काम शुरू हो जाएगा।
90 के दशक में कश्मीर से विस्थापित हजारों कश्मीरी पंडितों को छत मुहैया कराने के लिए जम्मू में वर्ष 2010 से कई चरणों में प्रवासी शिविर जगती, नगरोटा, बूटा नगर, मुट्ठी और पुरखू में आवास बनाए गए थे। मौजूदा समय इन सभी जगहों पर कुल 5248 आवास बने हैं। करीब 20 हजार से अधिक कश्मीरी पंडित परिवारों समेत यहां रहते हैं। इन शिविरों में रहने वालों की संख्या बढ़ती गई लेकिन आवास नहीं बढ़े। अलबत्ता रखरखाव के अभाव में मकान जर्जर होते गए। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता है। बिजली वायरिंग, सीवरेज, वाटर सप्लाई समेत अन्य सुविधाएं बदहाल होती गईं। स्कूल और कम्युनिटी हॉल का भी बुरा हाल है। रंग बदरंग हो गया है तो प्लास्टर उखड़ने लगे हैं। सड़कें टूट चुकी हैं। नालियों के टूट जाने के चलते गंदगी का अंबार है।
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प्रवासी शिविरों में बने आवासों, स्कूल और कम्युनिटी हॉल समेत अन्य सुविधाओं के नवीनीकरण के लिए 85 करोड़ रुपये की विस्तृत रिपोर्ट प्रदेश सरकार को भेज दी गई है। मुहर लगते ही लोक निर्माण विभाग काम शुरू कर देगा। प्राथमिकता में छतों की मरम्मत होगी।
- डॉ. अरविंद कारवानी, आयुक्त, राहत एवं पुनर्वास जम्मू-कश्मीर