भाजपा प्रवक्ता डॉ. अभिजीत जसरोटिया ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्याओं के रहने की वकालत करने वाले नेताओं को व्यक्तिगत रूप से उनकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। जम्मू में रोहिंग्याओं की अवैध उपस्थिति सुरक्षा के लिए खतरा है। इनको बसाने में मदद करने के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
जसरोटिया ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार राज्यों से सतर्क रहने और अवैध प्रवासियों को पहचान-दस्तावेज जारी करने से रोकने के लिए कहा है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में वोट बैंक की राजनीति के चलते ऐसे निर्देशों की अनदेखी की गई है। जम्मू में कुछ राजनीतिक नेता मानवीय प्रयासों की आड़ में इन अप्रवासियों के रहने की वकालत कर रहे हैं। हालांकि, यह दृष्टिकोण क्षेत्र की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय स्थिरता को कमजोर कर रहा है।
कहा, केंद्रीय गृह मंत्री की आतंकवाद मुक्त जम्मू-कश्मीर की प्रतिबद्धता ने सुरक्षा बलों को मजबूत किया है। प्रदेश में आतंकवाद और हिंसा को बढ़ावा देने वाले लोगों के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई है। हाल ही में मियां अब्दुल कयूम के खिलाफ एक पूरक आरोप पत्र दायर किया गया है, जिस पर एडवोकेट बाबर कादरी की हत्या और अन्य आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। कयूम पर अल्पसंख्यकों की लक्षित हत्याओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आरोप है। लेकिन कयूम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई एक स्पष्ट संदेश है कि आतंकवाद को सहायता देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।