जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठनों के लिए अब ड्रोन नए ‘ओवर ग्राउंड वर्कर’ (ओजीडब्ल्यू) बन गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह चिंता का विषय है ।
अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के चलते बड़ी संख्या में ओजीडब्ल्यू गिरफ्तार किए जा चुके हैं या भूमिगत हो गए हैं। इसके चलते आतंकी संगठन अब मानवीय नेटवर्क पर निर्भरता कम कर ड्रोन टेक्नोलॉजी की मदद ले रहे हैं।
आईएसआई की नई रणनीति
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ड्रोन के जरिये नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर आतंकियों को भेजने में मदद कर रही है। आतंकियों को घुसपैठ से पहले सेना की तैनाती, इलाके की स्थिति और कमजोरियों की जानकारी देने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कुछ आतंकी जो कश्मीर, किश्तवाड़ और राजौरी के ऊंचाई वाले इलाकों में छिपे हैं, वे ड्रोन से सैनिकों की गतिविधियों पर निगरानी रख रहे हैं। इससे सुरक्षा बलों को आतंक रोधी अभियानों में सीमित सफलता मिली है।
ड्रोन से राशन और निगरानी
ड्रोन के माध्यम से इन आतंकियों को सूखा राशन भी पहुंचाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि 2021 में जम्मू एयरपोर्ट पर दो ड्रोन हमलों के बाद आतंकी संगठनों द्वारा ड्रोन के उपयोग में तेजी आई है।
ड्रोन के इस्तेमाल की शुरुआत
2017 के बाद ड्रोन का उपयोग सबसे पहले पंजाब में ड्रग्स तस्करी के लिए हुआ। इसके बाद हथियार गिराने और अब जम्मू-कश्मीर में सीधे हमलों के लिए हो रहा है।
पीओके में बैठकें और नई योजनाएं
मई के तीसरे सप्ताह में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके ) में आईएसआई अधिकारियों और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष आतंकियों की एक बैठक हुई थी। इसमें एलओसी पर ड्रोन से निगरानी बढ़ाने और स्थानीय निवासियों को गाइड के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई।
ऑपरेशन सिंदूर की प्रतिक्रिया
बताया गया कि आईएसआई आतंकी ट्रेनिंग कैंप्स और लॉन्च पैड्स को पुनः व्यवस्थित कर रहा है, और भूमिगत बंकर भी बना रहा है। यह कदम भारत द्वारा किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के जवाब के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें भारतीय वायुसेना ने पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह किया था।
वैश्विक खतरा बनती ड्रोन टेक्नोलॉजी
ड्रोन टेक्नोलॉजी वैश्विक आतंकवाद के लिए एक नया और खतरनाक अध्याय बनती जा रही है। अमेरिका की सेना से जुड़ी एक रिपोर्ट के अनुसार, एक बार जब ‘पेंडोरा बॉक्स’ खुल गया, तो आतंकी संगठनों ने तेजी से इस तकनीक को अपनाया और इसका उपयोग हमलों में करना शुरू कर दिया।
रिपोर्ट में कहा गया कि आतंकी संगठन पूर्व संघर्षों से सीख रहे हैं और लगातार अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं। सबसे पहले इस्लामिक स्टेट ने इराक के मोसुल में ड्रोन का उपयोग किया था, जहां उन्होंने निगरानी और बमबारी दोनों के लिए यूएवी का इस्तेमाल किया।