85 महीने का मानदेय अभी बाकी, सरकार इसका भुगतान करे- सरकार जलशक्ति विभाग के अस्थायी कर्मियों का मानदेय 72 महीनों तक का मानदेय बकाया है। इसका हर हाल में भुगतान किया जाए। सरकार लगातार आश्वासन दे रही है लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं है। कर्मचारियों के बच्चों, परिवार के पालन पोषण में समस्या आ रही है। मुख्यमंत्री ने छह माह का समय मांगा है वह जरूर देंगे लेकिन कम से कम लद्दाख की तरह यहां पर भी मानदेय बढ़ाया जाए। राजेंद्र सिंह ताज, पदाधिकारी, पीएचई यूनाइटेड इंप्लाइज यूनियन
जम्मू के साथ हो रहा भेदभाव,सात वर्ष बाद भी नहीं हुए नियमित
एसआरओ 64 के तहत डेलीवेजेज कर्मियों को नियमतीकरण किया जाना था। 1994 से लेकर 2004 तक कुल 855 कर्मियों को नियमित किया गया। वहीं कश्मीर के अंदर 11 हजार से अधिक कर्मियों को नियमित किया गया। यह भेदभाव अभी तक बना रहा। यह अब खत्म होना चाहिए।कर्मचारियों को नियमित किया जाए। मोहन लाल शर्मा, अस्थाई कर्मचारी, जलशक्ति विभाग
सिंचाई विभाग में भी डेलीवेजेज कर्मियों की संख्या एक हजार से अधिक है। सरकार को चाहिए कि सभी डेलीवेजेज कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए। 30 वर्ष से अधिक हो गया। इस मुद्दे पर सरकार के आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला है। सरकार कर्मचारी हित में फैसला ले। जयपाल शर्मा, अस्थाई कर्मचारी, सिंचाई विभाग
सिंचाई विभाग के अस्थाई कर्मचारियों की भी नियमितीकरण की मांग है। नौ हजार रुपये में कोई कर्मचारी अपने बच्चों की स्कूल की फीस,परिवार का पालन पोषण कैसे करे। महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में छह माह का समय सरकार मांग रही है वह हम देने को तैयार हैं लेकिन वेतन बढ़ाया जाना चाहिए। प्रदीप कुमार, सिंचाई विभाग
हमारे जितने संगठन इस नियमितीकरण की लड़ाई को लड़ रहे हैं वह एकता का परिचय दें। एक साथ होकर उपराज्यपाल के सामने अपनी समस्या रखनी होगी। हमारे मन की बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचनी जरूरी है। जब विधायक अपने वेतन को बढ़ाए जाने के लिए तो बात करते हैं लेकिन अस्थाई कर्मचारियों के वेतन को बढ़ाए जाने के लिए कोई बात नहीं हो रही। शशि कुमार अस्थाई कर्मचारी, सिंचाई विभाग
सरकार जब मान रही है कि सभी 54 विभागों के डेलीवेजेज कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग जायज है तो जल्द से जल्द इस मांग को माना जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों का भविष्य छिपा है। सरकार लगातार हमें आश्वासन तो दे रही है लेकिन मांग नहीं मान रही है। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों के साथ न्याय करना चाहिए। मिथुन कुमार,सिंचाई विभाग
डेलीवेजेज कर्मचारियों के साथ राजनीति हो रही है। जब भी कोई सरकार आती है उसको हमारे अंदर राजनीति नजर आती है। सरकार बनते ही अपनी सुख सुविधाओं के लिए गाड़ियो की खरीद हुई लेकिन कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग पर कोई ध्यान नहीं है। कमेटी बनाकर हम कर्मचारियों का पेट भरने वाला नहीं है। नौ हजार रुपये में कोई कर्मचारी अपनी बेटी को कैसे पढ़ाएगा। इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा। विश्व दुबे, पीएचई विभाग
डेलीवेजेज कर्मचारियों को रविवार को भी छुट्टी नहीं मिल रही है। कम वेतन से जहां परिवार का पालन पोषण करने पर मजबूर हैं। कर्मचारियेां का जल्द से जलद नियमितीकरण किया जाए ताकि हम एक बेहतर जीवन गुजार सकें। इस तरह सरकार ध्यान दे और एक ठोस फैसला करे। बसंत सिंह, फ्लोरीकल्चर विभाग
सभी विभागों के अस्थाई कर्मचारियेां के नियमितीकरण की फाइल केवल टेबल पर धूल फांक रही है। इसको लेकर लगातार हम संघर्ष कर रहे हैं। बीते दिनों भी धरना प्रदर्शन किया गया है। आगे भी यही रणनीति है कि 21 मार्च को मांगें न मानने को लेकर काम बंद हड़ताल की जाएगी। 30 वर्ष से अधिक समय तक जो काम कर रहे हैं उनको नियमित किया जाए। हर छह माह में डीपीसी की व्यवस्था को कार्रवाई में लाया जाए। सुरजीत, अस्थाई कर्मचारी, बिजली कारपोरेशन
डेलीवेजेज कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए जो केंद्र शासित प्रदेश के नियम हैं। उनको लागू किया जाए। लद्दाख में जो नियम है उनको यहां पर भी लागू किया जाए। वेतन निर्धारित किया जाए ताकि कर्मचारियों के सामने परिवार चलाने की समस्या न हो। किसी भी द़ुर्घटना मेंं कम से कम एक करेाड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। गुरनाम सिंह, पीडीडी
सरकार एसआरओ 64 के तहत डेलीवेजेज कर्मचारियों को नियमित किया जाए। हम नौ हजार रुपये ही पा रहे हैं। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। कर्मचारियेां का कोई अंशदान नहीं काटा जा रहा है, भविष्य अधर में है। यदि मांगे नहीं मानी गईं तो हड़ताल आगे भी इसी तरह जारी रहेगी। अभी नहीं तो कभी नहीं के तर्ज पर हम चल रहे हैं। मोहन लाल शर्मा, अस्थाई कर्मचारी, जलशक्ति विभाग
सरकार में जब राजनीतिक दलों के लोग आते हैं तो उनकी भाषा बदल जाती है। विधानसभा में बीते दिनों नियमितीकरण को लेकर आवाज उठी। यह तब हुआ जब हम कर्मचारियों ने सड़क पर प्रदर्शन किया लाठी खाई। मुख्यमंत्री छह माह का समय मांग रहे हैं, हम देने को तैयार हैं लेकिन लेह लद्दाख की तर्ज पर हमें वेतन दिया जाए। कम से कम न्यूनतम वेतन तो कर्मचारियों को मिले। मुआवाजा कम से कम 15 लाख रुपये तक मिले। होशियार चिब,पीएचई