जम्मू-कश्मीर में डोगरी और हिंदी को राजभाषा का दर्जा मिलने के बाद भी इंग्लिश भाषा का वर्चस्व बरकरार है। जम्मू शहर में स्मार्ट सिटी के तहत लगाए गए साइन बोर्ड में सिर्फ अंग्रेजी भाषा में ही जानकारी दी गई है। जबकि हिंदी और डोगरी इसमें गायब है, जबकि जम्मू शहर में अधिकांश लोग हिंदी और डोगरी भाषा का उपयोग बोलचाल के साथ लिखने और पढ़ने में करते हैं।
किसी भी शहर में साइन बोर्ड लगाने का उद्देश्य स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को शहर के मुख्य रास्तों से जुड़ी जानकारी देना होता है। पंजाब, दिल्ली, राजस्थान सहित अन्य राज्यों में सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए साइन बोर्ड पर लिखी जानकारी इंग्लिश के साथ-साथ हिंदी और उस प्रदेश की आधिकारिक भाषा में होती है, लेकिन जम्मू शहर में करोड़ों की लागत से लगाए इन साइन बोर्ड पर लिखी जानकारी सिर्फ अंग्रेजी में ही है।
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वहीं कश्मीर संभाग में अंग्रेजी के साथ-साथ उर्दू भाषा में भी जानकारी लिखी है। जम्मू संभाग में विशेष कर जम्मू जिले में अधिकांश आबादी हिंदी और डोगरी भाषा का उपयोग करती है। प्रशासन को इन साइन बोर्ड पर लिखी जानकारी को अंग्रेजी के साथ-साथ डोगरी और हिंदी में भी लिखवानी चाहिए थी। शहर के स्थानीय लोगों का भी कहना है कि साइन बोर्ड पर अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी और डोगरी भाषा का भी उपयोग हाना चाहिए।