मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, अब कभी रोजे के दौरान बजट पेश नहीं करूंगा। उन्होंने यह बात विधानसभा में बजट पेश करने के बाद कही। अब्दुल्ला ने कहा, यह 2018 के बाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा का पहला बजट था और वित्त मंत्री के तौर पर मेरा पहला बजट भी। उन्होंने विधानसभा में लगभग 1 घंटा 45 मिनट तक बजट भाषण दिया, जबकि वह रमजान के छठे दिन का रोजा रख रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह बजट सत्र को आगे या पीछे भी कर सकते थे। उन्होंने कहा, आज के अनुभव के बाद, मैं फिर कभी रमजान के रोजे के दौरान बजट पेश नहीं करूंगा। या तो मैं सत्र को आगे या पीछे करूंगा या फिर स्पीकर से हाथ जोड़कर अनुरोध करूंगा कि सत्र शाम 6.30 बजे ( इफ्तार के बाद) के आसपास आयोजित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने यह बात पवित्र महीने में बजट पेश करने में आने वाली कठिनाइयों के बारे में एक सवाल के जवाब में कही। उन्होंने कहा कि बजट भाषण के बाद बोलने में उन्हें काफी दिक्कत हो रही थी, क्योंकि वह पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं कर सकते थे। उन्होंने ये भी कहा कि दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार था जब जम्मू-कश्मीर के किसी मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री का पदभार संभालते हुए खुद बजट पेश किया।