डिजिटल इंडिया के दौर में जहां हर व्यक्ति के हाथ में इंटरनेट से लेस स्मार्ट फोन है, वहीं जम्मू-कश्मीर में 78 फीसदी सरकारी स्कूल बिना इंटरनेट कनेक्शन हैं। सिर्फ 22 फीसदी स्कूलों में ही इंटरनेट कनेक्शन है। इतनी बड़ी संख्या में स्कूलों में इंटरनेट कनेक्शन नहीं होने से विभाग की स्मार्ट क्लास, आईटीसी लैब और कंप्यूटर की पढ़ाई के दावों की भी पोल खुल रही है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही संपन्न हुए मानसून सत्र में राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए ये आंकड़ा प्रस्तुत किया था। स्कूल शिक्षा विभाग एक तरफ दावा कर रहा है कि सरकारी स्कूलों को स्मार्ट क्लासेज, आईटीसी लैब और एस्ट्रो फिजिक्स लैब से लेस किया जा रहा है, लेकिन दूसरे तरफ स्कूलों में कार्यात्मक इंटरनेट कनेक्शन का नहीं होने इन लैब का होना सिर्फ नाम का है।
स्मार्ट क्लासेज और आईटीसी लैब के लिए जारी होता है इंटरनेट शुल्क
समग्र शिक्षा के तहत मिलने वाली स्मार्ट क्लासेज और आईटीसी लैब के लिए इंटरनेट शुल्क भी जारी होता है। स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार 2019-20 में सिर्फ 5.2 फीसदी स्कूलों में ही इंटरनेट सुविधा थी, जो 2021-22 में बढ़कर 22.3 तक पहुंच गई थी। केंद्र सरकार के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा प्रदेश को दिशानिर्देश जारी कर स्कूलों में इंटरनेट कनेक्शन लगाने को कहा है, बावजूद इसके विभाग स्कूलों में इंटरनेट कनेक्शन देने में विफल रहा है।
स्कूलों में इंटरनेट कनेक्शन देने के लिए विभाग लगातार काम रहा है, ताकि बच्चों को बेहतर ऑनलाइन शिक्षा मिले। छूटे हुए स्कूलों में जल्द सुविधा मुहैया करवा दी जाएगी।
- दीप राज, निदेशक, समग्र शिक्षा परियोजना।