वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू ने व्यापारिक समुदाय को आश्वस्त कियाहै कि जीएसटी में उनके हितों को पूरी तरह से संरक्षित किया जाएगा। राज्य सरकार नए जीएसटी शासन के तहत जम्मू और कश्मीर की वित्तीय स्वायत्तता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी।
जीएसटी को लेकर बुलाई गई बैठक में उन्होंने कहा कि हमने भारत सरकार के साथ संघीय संबंधों में बदलाव किए हैं, अन्य राज्यों ने भारत के संविधान से करों की शक्तियां प्राप्त की हैं जबकि हम इन शक्तियों को अपने संविधान से प्राप्त करते हैं।
उन विधायी शक्तियों से समझौता नहीं किया गया है, इसलिए वित्तीय स्वायत्तता के साथ समझौता करने का कोई सवाल ही नहीं है। जम्मू-कश्मीर के इतिहास में यह पहली बार है कि राज्य में केंद्रीय कानून के विस्तार को आवश्यक संवैधानिक संशोधन के लिए राज्य विधानसभा में बहस की जाएगी। अनुच्छेद 370 सुरक्षित है और रूपरेखा सुरक्षित हैं।
'व्यापारियों के लिए जीएसटी से बेहतर प्रणाली नहीं'
GST BILL
- फोटो : Demo Photo
उन्होंने कहा कि हम जीएसटी कार्यान्वयन को स्थगित कर सकते हैं लेकिन यह सरकार से ज्यादा कश्मीर के कारोबार को प्रभावित करेगा। जम्मू-कश्मीर में जीएसटी की अनुपस्थिति में, कोई भी हमारे साथ व्यापार करना नहीं चाहेगा। अगर वे व्यापार करते हैं, तो उपभोक्ता को दोहरे कराधान के माध्यम से दंडित किया जाएगा।
विश्वास दिलाया कि जीएसटी शासन के तहत किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। कहा कि व्यापारियों के लिए जीएसटी से बेहतर प्रणाली नहीं हो सकती है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में छूट की व्यवस्था भी जारी रहेगी। जीएसटी राज्य में लाूग नहीं होने पर जम्मू और कश्मीर का कारोबार प्रभावित होगा। यह संघीय कर है जहां जम्मू-कश्मीर एक भागीदार होगा।
जीएसटी की अनुपस्थिति में दो कर होंगे जो कि लागत में वृद्धि और उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा। व्यापार को बाधित किया जाएगा और कोई भी जम्मू-कश्मीर में कारोबार करने को तैयार नहीं होगा। जीएसटी कारोबार को आसान करेगा क्योंकि निरीक्षण ऑडिट दूर हो जाएंगे और व्यापारियों द्वारा मूल्यांकन किया जाएगा।