जहां एक तरफ बारिश से लोगों के चेहरे पर खुशी आती है, वहीं चिनाब नदी के किनारे बसे गांव इन्द्री, चक्क सिकंदर, बदोंवाल, सीतरेयाला और बकोर के लोग अब बादलों को देखकर सहम जाते हैं। इसका कारण 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ है, जिसने इन गांवों में भारी तबाही मचाई।
ग्रामीणों के अनुसार 26 अगस्त की शाम को चिनाब का जलस्तर अचानक बढ़ गया और पानी गांवों में घुस गया। इन्द्री गांव के सभी 38 घर क्षतिग्रस्त हो गए, खेत-खलिहान डूब गए, और लोग जान बचाने के लिए अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर सेना समय पर नहीं पहुंचती तो बड़ी जनहानि हो सकती थी। सेना ने ग्रामीणों को वाहनों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
ग्रामीण अब भी उस भयावह रात को याद कर सिहर उठते हैं। इन्द्री गांव के बुजुर्ग बिहारी लाल ने बताया, बारिश अब हमें जीवनदान नहीं, बल्कि विनाश का संकेत लगने लगी है। उनका कहना है कि प्रशासन ने अभी तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की है और अगर फिर से बाढ़ आई तो हालात और भी खराब हो सकते हैं।
कमलेश कुमारी ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बादलों को देखकर दिल घबराने लगता है। उन्हें बाढ़ से हुए नुकसान की चिंता सता रही है कि वे अपनी जिंदगी को फिर से कैसे पटरी पर लाएंगे। महिला कौशल्या देवी ने बताया कि मकान के अंदर बाढ़ से खराब हुआ सामान देखकर उनका दिल बैठ जाता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाए और बाढ़-नियंत्रण के लिए ठोस उपाय किए जाएं। यह केवल इन्द्री गांव का दर्द नहीं है, बल्कि चिनाब नदी के किनारे बसे सैकड़ों गांवों की कमोबेश यही व्यथा है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पुख्ता कदम नहीं उठाए गए, तो चिनाब का पानी कभी भी बड़ी तबाही ला सकता है।