रियासत में नई सरकार के लिए भले ही पीडीपी सिद्धांतों से समझौता न करने की बात कह रही है, लेकिन पार्टी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद ने सबका साथ, सबका विकास की बात कहकर एक तरह से भाजपा राग ही अलापा है। भाजपा ने लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में इस नारे को खूब भुनाया।
साथ ही मुफ्ती ने 2002 के केंद्र की राजग सरकार की सराहना की और अपने शपथ ग्रहण समारोह में मोदी द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बुलाए जाने को सकारात्मक कदम बताया।
सियासी पंडितों का मानना है कि राजनीतिक प्रतिबद्धता तथा अपनी घोर विरोधी नेकां के निशाने से बचने के लिए पीडीपी अपने चेहरे को साफ रखने का दिखावा कर रही है। इसी नाते वह सिद्धांतों से समझौता न करने की बात कह रही है।
2002 रियासत के लिए टर्निंग प्वाइंट
मोदी के विकास कार्यक्रमों का नाम लिए बगैर मुफ्ती ने कहा कि वर्ष 2002 रियासत के लिए टर्निंग प्वाइंट बना था। रियासत में पीडीपी-कांग्रेस गठजोड़ और केंद्र में एनडीए की सरकार थी। विकास की बयार बही। विदेशी मदद भी मिलने लगी।
रियासत में जेल सरीके माहौल में बदलाव आया। पाकिस्तान के साथ बस सेवा शुरू हुई। लेकिन बाद के दिनों में इसमें थोड़ा बदलाव आ गया। रियासत में अमन शांति के लिए पाकिस्तान से दोस्ताना संबंध अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र का मसला है। उसकी अपनी विदेश नीति है।
हम इस मामले में केंद्र को निर्देशित नहीं करना चाहते लेकिन जम्मू-कश्मीर का मसला एक दिन में हल नहीं हो सकता। एनडीए सरकार ने पाकिस्तान से दोस्ती की दिशा में कदम बढ़ाया था। इसे फिर से बहाल करने की जरूरत है। हालांकि, गठबंधन में पाटर्नर रहे कांग्रेस को किसी प्रकार का श्रेय देने की कोशिश नहीं की।
घाटी में ऐसा नहीं कि सभी अलगाववादी ही हैं
पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती ने कहा कि घाटी में ऐसा नहीं कि सभी अलगाववादी ही हैं। जम्हूरियत में लोगों का विश्वास बढ़ा है। यह विधानसभा चुनाव में भी स्पष्ट हो गया है। घाटी के लोगों के माथे पर आतंकवाद का दाग है।
ऐसा नहीं है कि यहां केवल आतंकवाद ही है। यहां के युवाओं में जबर्दस्त हुनर है। उन्होंने कहा कि इस दाग को मिटाना है। सियासी पंडितों का कहना है कि मोदी ने भी अपने दौरों में घाटी के लोगों को विकास, बेरोजगारी दूर करने और आतंकवाद के दाग को खत्म कर खुशहाल और विकसित रियासत बनाने का सपना दिखाया है।
कुल मिलाकर मुफ्ती भी विकास, युवाओं की बेहतरी तथा रियासत में अमन-चैन की ही लाइन पर आगे बढ़ रहे हैं।