अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर ने बाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 2022 के लिए सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में शिशु मृत्यु दर घटकर 14 प्रति हजार पहुंच गई है, जो पहले 16 थी।
शिशु मृत्यु दर में गिरावट राष्ट्रीय औसत 26 से कम है, जो प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता को दर्शाता है। एसआरएस के आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर की कुल जन्म दर 15.3 और मृत्यु दर 5.9 रही है। इससे प्रदेश की प्राकृतिक वृद्धि दर 9.4 दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिशु मृत्यु दर 15 दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवाएं अब गांवों तक पहुंच रही हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर विशेष जोर दिया गया है।
स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई गई हैं। जम्मू-कश्मीर में संस्थागत प्रसव के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इसमें माताओं को सुरक्षित प्रसव करवाया जा रहा है, जिससे मृत्यु दर में कमी आई है।
मिशन इंद्रधनुष में 0-5 वर्ष के बच्चों के टीकाकरण पर जोर है। इससे बच्चों को गंभीर बीमारियों की संभावना को कम और स्वास्थ्य जीवन पर जोर दिया जा रहा है। बिहार और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में शिशु दर अब भी 26 और 40 के आसपास है। वहीं जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय औसत से कम होना यह दर्शाता है कि प्रदेश में कठिन भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों, डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के बावजूद जनस्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है।