फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस मुहाने पर हमेशा मुंहकी खाता है पाकिस्तान

विज्ञापन
विज्ञापन
पाकिस्तान की ओर से रोजाना अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर की जा रही गोलाबारी को रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल की ओर से कार्य योजना तैयार कर ली गई है। अगर पाकिस्तान ने आने वाले दिनों में सीमा पर फायरिंग बंद नहीं की तो उसे भारत की ओर से पहले से भी करारा जवाब दिया जाएगा।
विज्ञापन


रक्षा सूत्रों की मानें तो शांति बनाए रखने के लिए भारत पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए नए मोर्चे खोलने की तैयारी में है, जिसमें कानाचक्क के चिकन नेक क्षेत्र में भारत पाकिस्तान को घेरेगा। आने वाले दिनों में कानाचक्क क्षेत्र में गोलाबारी शुरू होने की आशंका है। इस क्षेत्र में पाकिस्तान हमेशा से कमजोर रहा है।

इस कमजोरी का भारतीय सीमा सुरक्षा बल और सैन्य अधिकारियों को भलीभांति पता है। अगर जम्मू क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की ओर से फायरिंग बंद नहीं की जाती तो पाकिस्तान को इसका खामियाजा चिकन नेक क्षेत्र में भुगतना पड़ सकता है।
विज्ञापन


इस क्षेत्र में पाकिस्तान का रिहायशी क्षेत्र नजदीक होने के कारण पाकिस्तान तीन दिशाओं से भारतीय सुरक्षा बलों की मारक क्षेत्र में आता है। जब भी इस क्षेत्र में मोर्चे को खोला गया है तो पाकिस्तान को सफेद झंडे दिखाने को मजबूर होना पड़ा है।

सरहदी इलाकों में छाई बारूद की गंध

कठुआ। गोलाबारी के चलते भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों में सन्नाटा पसरा है। इक्का-दुक्का लोगों की आवाजाही ही देखने को मिलती है। वह भी जान जोखिम में डालकर माल मवेशियों को चारा डालने डालने जाते हैं। तनावपूर्ण हालात के बीच जो लोग अपने घरों में डटे हैं, उनमें ज्यादातर उम्रदराज हैं, जो किसी भी हाल में न घर छोड़ना चाहते हैं न गांव।

अंतरराष्ट्रीय सीमा के नजदीक केे पानसर, छन्न लाल दीन और मनियारी से अधिकांश लोग गांव छोड़ चुके हैं। कमोबेश ऐसे ही हालात बोबिया व साथ लगते गांवों के हैं। अब तक डेढ़ दर्जन घरों पर पाकिस्तानी रेंजरों ने गोले बरसाए हैं, जिससे वह छलनी हो चुके हैं। किसी घर की दीवार टूट गई है, तो किसी की छत क्षतिग्रस्त है।

उधर पाकिस्तान से दागे गए कई गोले भारतीय सरहद के गांव में गिरने के बावजूद जिंदा हैं। चक चंगा गांव में गिरे एक शेल को बाकायदा चारों तरफ से ढंक कर सुरक्षा दी गई है। कुल मिलाकर सीमावर्ती गांवों की आबोहवा में बारूद की गंध घुल गई है, जो कभी धमाकों की आवाज के साथ सिहरन पैदा कर रही है, तो कभी स्थानीय जीवन को जख्म दे रही है।

उल्लेखनीय है कि भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जीरो लाइन के निकट बाईस गांव पड़ते हैं। पाकिस्तानी गोलाबारी से प्रभावित रहने वाले पांच किलोमीटर के दायरे में 57 गांव आते हैं।
विज्ञापन

रात की गोलाबारी से दहशत, पलायन की स्थिति

अरनिया। भारत-पाक अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सोमवार रात को हुई हल्की गोलाबारी से यहां क्षेत्र के लोग रात भर दहशत में रहे वहीं इस भीषण सर्दी में विस्थापन को लेकर भी चिंता सताती रही। क्षेत्र की करीब 32 किलोमीटर लंबी भारत-पाक सीमा पर अचानक शाम 7.35 पर जब पीतल पोस्ट पर हल्के हथियारों से फायर होना शुरू हुआ तो लोगों में दहशत उत्पन्न होने लगी।

ठीक पच्चीस मिनट बाद जब पाक ने टेंट गार्ड और चिनाज पोस्ट पर एचएमजी के फायर करने शुरू कर दिये तो गांवों के साथ कस्बे के बाजार भी बंद होने शुरू हो गए। देखते ही देखते क्षेत्र में सन्नाटा पसर गया। रात 9.25 बजे तक चली इस गोलाबारी में पाक ने दो मोर्टार के गोले भी दागे जो खेतों में गिरे।

गनीमत रही कि कोई भी हताहत नहीं हुआ। गोलाबारी के दौरान पलायन की स्थिति भी उत्पन हो चुकी थी मगर कड़ाके की ठंड से लोगों ने अपने घरों में ही दुबके रहना मुनासिब समझा। सीमांत क्षेत्र के सरपंच रघुबीर सिंह का कहना है कि गोलों के बरसाए जाने के दौरान कोई भी रहना नहीं चाहता हर कोई इनसे बचने के लिए सुरक्षित स्थान पर जाना चाहता है मगर ठंड आड़े आ रही है।

कड़ाके की ठंड में पलायन तो किया जा सकता है मगर शिविरों में रात गुजारने के लिए रजाइयों और गर्म कपड़ों को साथ लेकर कैसे भागें। अब से ज्यादा दिक्कत तो हमें यह आ रही है कि अभी तक सरकार ने हमें कोई भी स्थायी जगह या मकान नहीं दिया है यहां से भागकर कर हम वहां रात गुजार सके।

वहीं अरनिया के तहसीलदार का कहना है कि हम लगातार लोगों के संपर्क में रह कर स्थिति पर नजर जमाए हैं अगर गोलाबारी के दौरान पलायन की स्थिति बन जाती है तो लोगों के लिए शिवरों की जगह चिह्नित कर दिया गया है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें