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घाटी में ध्वस्त होंगे हिजबुल और लश्कर के पनाहगाह, बड़ी कार्रवाई की तैयारी

Fri, 12 May 2017 01:54 PM IST
amarujala.com- Presented by: श्रेयांश त्रिपाठी
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indian army - फोटो : File Photo
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लेफ्टिनेंट उमर फैयाज की हत्या के बाद दक्षिण कश्मीर के युवाओं में आतंकी संगठनों के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। सेना और सुरक्षा बलों को आतंकी संगठनों के पनाहगाहों के बारे में कई चौंकाने वाली जानकारियां मिल रहीं हैं।
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सूत्रों को मुताबिक शोपियां और त्राल के जंगलों में हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर -ए-तैयबा के ठिकानों के बारे में सेना को ठोस सूचनाएं मिलीं हैं। आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में ऐसे इनपुट से काफी मदद मिलने की उम्मीद जगी है।

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक लेफ्टिनेंट की हत्या से जुड़े आतंकियों के बारे में सुराग मिल गए हैं। सेना ने कार्रवाई के लिए रणनीति तय कर ली है। 
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आतंकियों ने की थी दहशत फैलाने की कोशिश

आतंकियों ने की थी दहशत फैलाने की कोशिश - फोटो : Demo Photo
दरअसल पत्थरबाजी के बीच सेना और पुलिस की भर्ती रैलियों में कश्मीरी युवकों की लगातार बढ़ रही भीड़ से आतंकी संगठन बौखला गए थे। आतंकियों के धमकी भरे पोस्टर और एसपीओ के सिर मुंडवाने वाले वीडियो भी बेअसर साबित हो रहे थे।

यही कारण है कि आतंकियों ने सेना में शामिल हुए कश्मीरी युवकों को निशाना बनाकर चेतावनी देने की रणनीति बनाई थी। सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक साजिश रचकर लेफ्टिनेंट फैयाज की हत्या की गई ताकि सेना की भर्ती रैलियों में कश्मीरी युवकों को शामिल होने से रोका जा सके। लेकिन इस हत्याकांड का उल्टा असर पड़ रहा है।

आतंकियों को अब दक्षिणी कश्मीर में पनाह मिलने में दिक्कत होने लगी है। सूत्रों की मानें तो शोपियां में एक गांव में बुधवार को तीन आतंकियों को रात बिताने की जगह नहीं मिली। इन आतंकियों ने सेब बगीचे में रात गुजारी। अब सेना उनकी तलाश कर रही है। 
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कश्मीर में यूथ आइकन थे फैयाज

लेफ्टिनेंट उमर फैयाज - फोटो : FILE PHOTO
सेना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक तमाम कोशिशों के बावजूद आतंकी संगठनों में अब कश्मीर युवकों के शामिल होने की गति धीमी हुई है। आतंकी बुरहान वानी की मौत के बाद अकेले दक्षिणी कश्मीर से 110 युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए थे।

श्रीनगर उपचुनाव के बाद हिंसा और पत्थरबाजी जरूर बढ़ी लेकिन युवकों के आतंकी संगठनों में शामिल होने का नया मामला सामने नहीं आया है। लेफिटनेंट फैयाज आतंकी संगठनों के लिए चुनौती बन गए थे। फैयाज ने कश्मीरी युवकों को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करना शुरू किया था।

कुलगाम में फैयाज ने स्कूल का उद्घाटन भी किया था। फैयाज ने स्कूलों को जलाने और कालेज के छात्र-छात्राओं को पत्थरबाजी में शामिल करने की साजिश का भी मुखर विरोध किया था। इस वजह से वे आतंकी संगठनों के निशाने पर आए। 
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