चाहे रेगिस्तान हो या फिर बर्फीली पहाड़ियां, हर एक कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए भारतीय वायु सेना हमेशा तैयार रहती है। सेना ने एक बार फिर अहम भूमिका निभाते हुए गर्भवती महिला की जान बचाई है।
एयर फोर्स स्टेशन लेह में तैनात सियाचिन पायनियर्स द्वारा शिनकुन-ला पास घाटी के कुर्गिआक में फंसी गर्भवती महिला को खराब मौसम के बावजूद भी एयरलिफ्ट किया गया। जानकारी के अनुसार तीन माह से गर्भवती महिला स्टैन्जिन लाटोन की तबीयत अचानक से खराब हो गई।
सह डिसफेगिया से पीड़ित थी। यह इलाका भारी बर्फबारी के कारण शेष क्षेत्र से स्थल मार्ग से कटा था। इसके चलते उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए केवल एयरलिफ्ट करना ही एकमात्र चारा था। मामला सामने आने के बाद इसकी जिम्मेदारी सियाचिन पायनियर्स को सौंपी गई, लेकिन मौसम खराब होने के चलते यह चुनौती भरा कार्य था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन वायु सेना के अधिकारियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन की तैयारियां शुरू कर दीं। तब तक दोपहर के दो बज चुके थे। मौसम भी रुख बदल रहा था, लेकिन इस बीच मौसम का आंकलन कर उन्होंने अपने दो हेलीकाप्टर की फार्मेशन तैयार की और 30 मिनट की भीतर टेक-ऑफ करने को तैयार हो गए।
अपने इरादों को और मजबूत करते हुए वायुसेना के विंग कमांडर एसआई खान और लाइट लेफ्टिनेंट प्रवीण लीड एयरक्राफ्ट में जबकि विंग कमांडर एसके प्रधान और स्क्वॉड्रन लीडर ए बेडेकर दूसरे विमान में खराब मौसम के बीच पहले सफलतापूर्वक पदम गाव में लैंड करवाने में सफल रहे।
अब आगे की दूरी केवल 50 किलोमीटर की थी, लेकिन बर्फ से ढकी पहाड़ियों के चलते वहां लैंड करना काफी मुश्किल था। आखिरकार हर खतरे को मात देते हुए एक ढलान पर लैंडिंग कराई गई। ऊंचाई अधिक होने के कारण महिला को सांस लेने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा था।
लेकिन किसी तरह से महिला को वहां से एयरलिफ्ट किया गया और लेह के अस्पताल पहुंचाया गया।गौरतलब है कि पाकिस्तान और चीन की सीमा से सटा लेह इन दिनों बर्फ से ढका हुआ है। सड़क मार्ग से यहां पहुंचना बेहद मुश्किल है।
लिहाजा, वायु सेना की समय रहते की गई कार्रवाई के चलते जच्चा-बच्चा की जान बचाई जा सकी। इससे पूर्व भी वायु सेना द्वारा गुरेज से एक बच्चे को श्रीनगर एयरलिफ्ट कर उसकी जान बचाई थी।